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पीयू की खस्ता वित्तीय हालत पर हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी, नेताओं को लताड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 05 May 2017 10:22 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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पंजाब यूनिवर्सिटी की खस्ता वित्तीय हालत पर लिए गए संज्ञान पर सुनवाई के दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नेताओं के वादों पर टिप्पणी की। हाईकोर्ट को बताया गया कि कई नेताओं ने सामने आकर पीयू की मदद करने की बात कही है।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ घोषणाएं करने से न तो छात्रों की परीक्षाएं पूरी होंगी और न ही शिक्षकों को वेतन मिलेगा। नेता वादे भर के लिए हैं या कोई सहायता असल में भी होगी। पंजाब सरकार को चाहिए कि अब वह आगे आकर पीयू को दी जा रही ग्रांट में बढ़ोतरी करे।
वीरवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उसकी ओर से अप्रैल माह में पीयू को 20 करोड़ 50 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यह राशि बेहद मामूली है। इसे बढ़ने पर गौर किया जाना, अब समय की जरूरत है।
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सुनवाई के दौरान कुलपति अरुण ग्रोवर ने एक फार्मूला सुझाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 60 करोड़ और पंजाब सरकार 40 करोड़ रुपये जारी कर दे तो पीयू इससे रिजर्व फंड तैयार करेगा और मुश्किल की परिस्थितियों में इसे इस्तेमाल कर सकेगा।
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इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ घोषणाएं करने से न तो छात्रों की परीक्षाएं पूरी होंगी और न ही शिक्षकों को वेतन मिलेगा। नेता वादे भर के लिए हैं या कोई सहायता असल में भी होगी। पंजाब सरकार को चाहिए कि अब वह आगे आकर पीयू को दी जा रही ग्रांट में बढ़ोतरी करे।
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वीरवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उसकी ओर से अप्रैल माह में पीयू को 20 करोड़ 50 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यह राशि बेहद मामूली है। इसे बढ़ने पर गौर किया जाना, अब समय की जरूरत है।
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सुनवाई के दौरान कुलपति अरुण ग्रोवर ने एक फार्मूला सुझाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 60 करोड़ और पंजाब सरकार 40 करोड़ रुपये जारी कर दे तो पीयू इससे रिजर्व फंड तैयार करेगा और मुश्किल की परिस्थितियों में इसे इस्तेमाल कर सकेगा।
फरवरी से जुलाई के बीच फंड की बेहद जरूरत होती
हाईकोर्ट
फरवरी से जुलाई के बीच फंड की बेहद जरूरत होती है। उसके बाद जुलाई में एडमिशन फीस आने से काम चल सकता है। इन महीनों में अगर पीयू के पास रिजर्व फंड उपलब्ध हों तो स्थिति में सुधार हो सकता है। इससे पूर्व कुलपति अरुण ग्रोवर ने हाथ खड़े करते हुए हाईकोर्ट में कह दिया है कि अब तो यूनिवर्सिटी के पास अपने शिक्षकों और कर्मियों का वेतन जारी करने और परीक्षाएं आयोजित करने तक के पैसे नहीं हैं। पीयू अब बंद होने की कगार पर है और कोई नहीं चाहता की पीयू चले।
इस दौरान यूजीसी ने कहा कि उसने पीयू को 20 करोड़ जारी कर दिए हैं। इस पर कुलपति ने कहा कि 20 करोड़ काफी नहीं हैं, 30 करोड़ की जरूरत है। हमारे सभी फंड खत्म हो चुके हैं। परीक्षा फीस पहले ही वेतन देने में खर्च हो चुकी है। यूजीसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका विचाराधीन है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है तो वह कोई निर्देश जारी नहीं करेंगे
लेकिन खंडपीठ ने यूजीसी को फटकार लगाते हुए कहा कि यूजीसी की अपनी निजी संपत्ति नहीं है, क्यों नहीं पीयू की ग्रांट बढ़ाई जाती है। अन्य यूनिवर्सिटी की तर्ज पर इसे भी बढ़ी ग्रांट दी जानी चाहिए। पीयू के लिए कोई भीख नहीं मांगी जा रही है। यूजीसी एक संस्था है न कि कोई निजी संस्थान, जिसे अपनी जेब से भुगतान करना हो। कल्याणकारी कार्य के लिए सरकारी पैसे का प्रयोग हो तो इसमें क्या बुराई है।
इस दौरान यूजीसी ने कहा कि उसने पीयू को 20 करोड़ जारी कर दिए हैं। इस पर कुलपति ने कहा कि 20 करोड़ काफी नहीं हैं, 30 करोड़ की जरूरत है। हमारे सभी फंड खत्म हो चुके हैं। परीक्षा फीस पहले ही वेतन देने में खर्च हो चुकी है। यूजीसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका विचाराधीन है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है तो वह कोई निर्देश जारी नहीं करेंगे
लेकिन खंडपीठ ने यूजीसी को फटकार लगाते हुए कहा कि यूजीसी की अपनी निजी संपत्ति नहीं है, क्यों नहीं पीयू की ग्रांट बढ़ाई जाती है। अन्य यूनिवर्सिटी की तर्ज पर इसे भी बढ़ी ग्रांट दी जानी चाहिए। पीयू के लिए कोई भीख नहीं मांगी जा रही है। यूजीसी एक संस्था है न कि कोई निजी संस्थान, जिसे अपनी जेब से भुगतान करना हो। कल्याणकारी कार्य के लिए सरकारी पैसे का प्रयोग हो तो इसमें क्या बुराई है।