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‘पत्नी की मंजूरी के बिना दूसरी शादी कर सुरक्षा मांगे तो यह उम्मीद न रखे’
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 11 Jun 2017 01:26 PM IST
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दो बच्चों का पिता पहली पत्नी की मंजूरी के बिना दूसरी शादी कर सुरक्षा के लिए गुहार लगाए तो वह अदालत से राहत की उम्मीद कैसे कर सकता है। यह न्याय के खिलाफ है और इस तरह के प्रेमी जोड़े को कोई राहत नहीं दी जा सकती है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एबी चौधरी ने यह आदेश मेवात निवासी मोहम्मद राशिद की याचिका को खारिज करते हुए जारी किए।
याचिका खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि युवक की पहली पत्नी जिंदा है और बिना उसकी मंजूरी के यह शादी की गई। यदि इस जोड़े को सुरक्षा दी जाती है तो यह न्याय के संतुलन को बिगाड़ने वाली बात होगी।
इसी बीच दो बच्चों के पिता के साथ जाने वाली युवती के भाई की ओर से एडवोकेट एमडी खान ने सुरक्षा दिए जाने का विरोध किया। खान ने कहा कि जो व्यक्ति पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं, अपनी पहली पत्नी की मंजूरी के बगैर दूसरी शादी कर रहा है, उसे सुरक्षा दी जाती है तो गलत उदाहरण पेश होगा।
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शरीयत भी इसकी अनुमति नहीं देती कि पहली पत्नी के रहते और उसकी अनुमति के बिना शौहर दूसरी शादी कर सके। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सुरक्षा देने को न्याय के संतुलन के खिलाफ करार देते हुए सुरक्षा सहित किसी भी राहत से साफ इनकार कर दिया।
यह है मामला
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा गया था कि परिजनों की मंजूरी के खिलाफ शादी की है और उसकी जानमाल को खतरा है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की कि याचिकाकर्ता और जिस लड़की से उसने शादी की है, उन दोनों को सुरक्षा मुहैया करवाने के लिए राज्य सरकार को आदेश दिए जाएं।
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याचिका खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि युवक की पहली पत्नी जिंदा है और बिना उसकी मंजूरी के यह शादी की गई। यदि इस जोड़े को सुरक्षा दी जाती है तो यह न्याय के संतुलन को बिगाड़ने वाली बात होगी।
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इसी बीच दो बच्चों के पिता के साथ जाने वाली युवती के भाई की ओर से एडवोकेट एमडी खान ने सुरक्षा दिए जाने का विरोध किया। खान ने कहा कि जो व्यक्ति पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं, अपनी पहली पत्नी की मंजूरी के बगैर दूसरी शादी कर रहा है, उसे सुरक्षा दी जाती है तो गलत उदाहरण पेश होगा।
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शरीयत भी इसकी अनुमति नहीं देती कि पहली पत्नी के रहते और उसकी अनुमति के बिना शौहर दूसरी शादी कर सके। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सुरक्षा देने को न्याय के संतुलन के खिलाफ करार देते हुए सुरक्षा सहित किसी भी राहत से साफ इनकार कर दिया।
यह है मामला
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा गया था कि परिजनों की मंजूरी के खिलाफ शादी की है और उसकी जानमाल को खतरा है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की कि याचिकाकर्ता और जिस लड़की से उसने शादी की है, उन दोनों को सुरक्षा मुहैया करवाने के लिए राज्य सरकार को आदेश दिए जाएं।