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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Haryana Highcourt Decision in Case of Job to Daughter after Father Death

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, विवाहित बेटी अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए पात्र नहीं है

Wed, 22 Aug 2018 11:59 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 22 Aug 2018 11:59 AM IST
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Punjab Haryana Highcourt Decision in Case of Job to Daughter after Father Death
bride
विवाहित बेटी को अनुकंपा आधार पर नौकरी नहीं दी जा सकती है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका का निपटारा करते हुए यह बड़ा फैसला सुनाया है। विवाहित बेटी को नौकरी देने से मृतक के आश्रित परिवार को कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलता, जो अनुकंपा आधार पर नौकरी देने का मुख्य उद्देश्य है।
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अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की नीति मृतक के आश्रितों को वित्तीय संकट की स्थिति से उबारने के लिए बनाई गई  है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम आदेश गुरप्रीत कौर की याचिका को खारिज करते हुए सुनाया है।
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याचिका दाखिल करते हुए गुरप्रीत कौर ने कहा था कि उसके पिता पंजाब में जेबीटी अध्यापक थे और उनकी मौत 17 अगस्त 2001 को हो गई थी। 11 दिसंबर 2001 को याची ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया था जो ऑब्जेशन लगकर वापस आ गया।
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इसके बाद 7 मई 2002 को फिर से आवेदन किया गया जिसका 2012 में इसका जवाब आया कि उसका आवेदन पत्र ट्रेस नहीं हो पा रहा है। इसके बाद जनवरी 2012 में फिर से आवेदन किया गया जिसे 4 जून 2014 को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि याची की शादी हो चुकी है।

सिंगल बेंच में खारिज की थी याचिका

Punjab Haryana Highcourt Decision in Case of Job to Daughter after Father Death
हाईकोर्ट
सिंगल बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया जिसके बाद याचिका सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच के समक्ष पहुंची। डिवीजन बेंच ने भी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची का जन्म 1984 में हुआ था और ऐसे में 2001 में आवेदन के दौरान वह नाबालिग थी। 2002 में आवेदन किया और वह तब भी नाबालिग थी।

इसके बाद वह 20012 तक चुप रही। इस दौरान उसने हायर एजुकेशन भी हासिल की। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए इतने लंबे समय का अंतराल वैध नहीं है। दूसरी बात यह कि परिवार की खराब वित्तीय स्थिति सुधारने केलिए अनुकंपा आधार पर नौकरी दी जाती है।

याची ने हायर एजुकेशन हासिल की जिससे साबित होता है कि परिवार की वित्तीय स्थिति बेहतर हो चुकी थी। इसके बाद 2012 में उसने शादी कर ली। ऐसे में यदि उसे नौकरी दी भी जाए तो वह अपने पति से जुड़े परिवार को मदद करेगी न की उसके मृतक पिता द्वारा छोड़े गए आश्रितों को इसका लाभ मिलेगा।

ऐसे में अनुकंपा आधार पर नौकरी देने का उद्देश्य ही नहीं पूरा होगा जो मृतक कर्मी के आश्रित परिवार को आर्थिक मदद देना है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
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