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हाईकोर्टः किस कानूनी प्रावधान के तहत गृह सचिव ने दिया था सीबीआई जांच का आदेश

Wed, 12 Sep 2018 09:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 12 Sep 2018 09:51 AM IST
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punjab haryana highcourt Comment on Akshak Sen murder case
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
हिमाचल के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के भतीजे अकांक्ष सेन की हत्या मामले की जांच सीबीआई को किस प्रावधान के तहत सौंपी गयी थी, इसका जवाब न देना प्रशासन को भारी पड़ गया। हाईकोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि अगली सुनवाई पर या तो जवाब सौंपा जाए या गृह सचिव खुद कोर्ट में हाजिर रहें।
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अकांक्ष सेन को चंडीगढ़ के सेक्टर-9 में एक बीएमडब्ल्यू कार ने कुचल दिया था। घटना के बाद चालक फरार हो गया था। पुलिस को दी शिकायत में कहा गया था कि अकांक्ष सेन पर जानबूझ कर गाड़ी चढ़ाई गई। अकांक्ष सेक्टर-9 में ही रहता था और उसी सेक्टर में उसका एक दोस्त शेरा भी रहता था। घटना की रात को वह शेरा के पास ही रुका था।
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 इस मामले में पेप्सू राज्य के पहले सीएम ज्ञान सिंह रारेवाला के पोते हरमेहताब सिंह रारेवाला को मुख्य आरोपी बनाया गया था और पुलिस की गिरफ्त से बाहर होने के चलते उसे प्रोक्लेम अफेंडर घोषित कर दिया गया था। इस मामले में मुख्य गवाह बूम बॉक्स कैफे की को- ऑनर अदम्या राठौर पहले ही गवाही दे चुकी हैं। आरोपों के अनुसार 9 फरवरी को बूम बॉक्स कैफे के पीछे वीरभद्र सिंह के रिश्तेदार अकांक्ष सेन पर बीएमडब्ल्यू चढ़ा दी गई थी।
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 इस घटना को बूम बॉक्स में आए एक समूह द्वारा अंजाम दिया गया था जिसमें तीन लड़कियां भी शामिल थीं। शिकायत के अनुसार बलराज रंधावा गाड़ी चला रहा था और हरमेहताब रारेवाला उससे कह रहा था इसे टक्कर मारो और खत्म कर दो। इस मामले में जिला अदालत में चालान पेश किया जा चुका है।

सीबीआई ने जांच का प्रस्ताव नकारा: वकील
  मामले की पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया था कि अकांक्ष सेन हत्याकांड मामले की जांच सीबीआई को दी गई है। इसके बाद सीबीआई के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि गृह सचिव द्वारा भेजे गए जांच के प्रस्ताव को नकार दिया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने गृह सचिव से पूछा था कि सीबीआई को जांच के लिए निवेदन किस कानूनी प्रावधान के तहत किया गया था। 


मंगलवार को सुनवाई के दौरान भी चंडीगढ़ प्रशासन इस बारे में जवाब नहीं दे पाया। इस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन को स्पष्ट कर दिया कि यदि अगली सुनवाई पर जवाब नहीं आया तो गृह सचिव को कोर्ट में खुद हाजिर रहना होगा। मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।
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