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आरक्षण चाहिए तो आरक्षित श्रेणी में ही करना होगा आवेदन: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 05 Apr 2017 09:08 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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आरक्षित श्रेणी को मिलने वाले लाभ के लिए कोई व्यक्ति तभी क्लेम कर सकता है, जब उसने रिजर्व कैटेगरी से आवेदन किया हो। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि आरक्षण का लाभ चाहिए तो आरक्षित श्रेणी में ही आवेदन करना होगा।
मोहाली निवासी गुरिंदर सिंह ने याचिका दाखिल कर कहा था कि पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने असिस्टेंट इंजीनियर इलेक्ट्रिकल के 117 पदों के लिए आवेदन मांगा था। याची ने कहा कि मेरिट में उसके 48.75 प्रतिशत अंक बने थे और एससी वर्ग को छोड़कर बाकी सभी के लिए न्यूनतम अंक 50 निर्धारित किए गए थे। पंजाब सरकार ने इस दौरान पिछड़ा वर्ग के लिए योग्यता मानक घटाकर 40 प्रतिशत कर दिए।
इस कारण उससे कम अंक प्राप्त करने वाले पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को दस्तावेजों की छंटनी के लिए बुला लिया गया, जबकि याची को नहीं। याची ने कहा कि वह भी पिछड़ा वर्ग से संबंधित है और ऐसे में समानता के अधिकार के तहत उसे भी मौका दिया जाना चाहिए था।
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मोहाली निवासी गुरिंदर सिंह ने याचिका दाखिल कर कहा था कि पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने असिस्टेंट इंजीनियर इलेक्ट्रिकल के 117 पदों के लिए आवेदन मांगा था। याची ने कहा कि मेरिट में उसके 48.75 प्रतिशत अंक बने थे और एससी वर्ग को छोड़कर बाकी सभी के लिए न्यूनतम अंक 50 निर्धारित किए गए थे। पंजाब सरकार ने इस दौरान पिछड़ा वर्ग के लिए योग्यता मानक घटाकर 40 प्रतिशत कर दिए।
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इस कारण उससे कम अंक प्राप्त करने वाले पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को दस्तावेजों की छंटनी के लिए बुला लिया गया, जबकि याची को नहीं। याची ने कहा कि वह भी पिछड़ा वर्ग से संबंधित है और ऐसे में समानता के अधिकार के तहत उसे भी मौका दिया जाना चाहिए था।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
इस बीच पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से एडवोकेट विकास चतरथ ने बताया कि भर्ती में पिछड़ा वर्ग के आवेदकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी और कहा था कि पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को योग्यता मानकों में छूट दी जाए।
उस समय हाईकोर्ट ने आवेदकों को इस पर रिप्रजेंटेशन सरकार को सौंपने के आदेश दिए थे और इस रिप्रजेंटेशन पर सरकार को फैसला लेने का आदेश दिया था। इसके बाद सरकार ने स्टेंड लिया और न्यूनतम अनिवार्य योग्यता को पिछड़ा वर्ग के लिए 50 से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया। याची ने पिछड़ा वर्ग के तहत आवेदन नहीं किया था। इसलिए उसे कंसीडर नहीं किया।
जस्टिस जसवंत सिंह ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पिछड़ा वर्ग को दिए गए लाभ पर समानता के अधिकार के तहत दावा तभी किया जा सकता है, जब पिछड़ा वर्ग के तहत आवेदन किया गया हो। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची ने पिछड़ा वर्ग से संबंधित होने के बावजूद सामान्य श्रेणी से आवेदन किया था और ऐसे में हाईकोर्ट उसे कोई राहत नहीं दे सकता है।
उस समय हाईकोर्ट ने आवेदकों को इस पर रिप्रजेंटेशन सरकार को सौंपने के आदेश दिए थे और इस रिप्रजेंटेशन पर सरकार को फैसला लेने का आदेश दिया था। इसके बाद सरकार ने स्टेंड लिया और न्यूनतम अनिवार्य योग्यता को पिछड़ा वर्ग के लिए 50 से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया। याची ने पिछड़ा वर्ग के तहत आवेदन नहीं किया था। इसलिए उसे कंसीडर नहीं किया।
जस्टिस जसवंत सिंह ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पिछड़ा वर्ग को दिए गए लाभ पर समानता के अधिकार के तहत दावा तभी किया जा सकता है, जब पिछड़ा वर्ग के तहत आवेदन किया गया हो। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची ने पिछड़ा वर्ग से संबंधित होने के बावजूद सामान्य श्रेणी से आवेदन किया था और ऐसे में हाईकोर्ट उसे कोई राहत नहीं दे सकता है।