{"_id":"5a4b23864f1c1b4d198b45c5","slug":"punjab-haryana-highcourt-cancelled-fir-on-teacher","type":"story","status":"publish","title_hn":"FB पर जाति को लेकर टिप्पणी की थी, हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, टिप्पणी भी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
FB पर जाति को लेकर टिप्पणी की थी, हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, टिप्पणी भी
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 02 Jan 2018 11:45 AM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक स्कूल के कंप्यूटर शिक्षक की ओर से फेसबुक पर जाति विशेष को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में हाईकोर्ट ने राहत देते हुए विशेष टिप्पणी की। साथ ही हाईकोर्ट ने शिक्षक पर दर्ज एफआईआर रद्द करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार की ओर से दलील दी गई कि एक व्यक्ति पूरी जाति विशेष के प्रतिनिधि के रूप में समझौता नहीं कर सकता है। हाईकोर्ट ने इस दलील को सामाजिक सद्भाव को आधार बनाते हुए खारिज कर दिया।
याचिका दाखिल करते हुए शिक्षक सरफराज़ अंजुम की ओर से एडवोकेट मोहम्मद अरशद ने हाईकोर्ट के सामने दलीलें रखीं। अरशद ने कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 2011 में हुई थी और तब से लेकर अब तक उनका कैरियर बेदाग रहा है। अभी तक एसीआर में ज्यादातर एंट्री एक्सीलेंट की हैं। राजनीति चमकाने के लिए उनकी पोस्ट को मुद्दा बनाया गया और उन पर एफआईआर दर्ज करवा दी गई।
याचिकाकर्ता ने कहा कि यह एफआईआर दो समुदायों के बीच तनाव पैदा कर उसका राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास है जो पूरा नहीं होने देना चाहिए। याची ने कहा कि इस मामले के बाद उसको सस्पेंड भी कर दिया गया जो गलत है। जो टिप्पणी याचिकाकर्ता ने फेसबुक पर डाली थी वह कॉपी पेस्ट थी। जो टिप्पणी की गई थी वह सामान्य वर्ग में बेहद साधारण थी। किसी भी प्रकार की गाली या अभद्रता का प्रयोग नहंी था। याची ने बताया कि इसके बाद एक पंचायत भी बुलाई गई थी जिसमें 36 बिरादरी शामिल थी। लेकिन तब भी दुर्व्यवहार की कोई बात नहीं हुई। इस मामले में याची को फंसाने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
ऐसे में रोशन लाल व अन्य द्वारा दर्ज 9 मार्च 2017 की एफआईआर रद्द की जाए। इसी बीच दोनों पक्षों के बीच समझौते की दलील दी गई। इसका सरकारी वकील ने यह कहते हुए विरोध किया कि पूरे समुदाय के हुए अपमान केलिए कोई एक आदमी समझौता नहीं कर सकता है इसलिए एफआईआर रद्द न की जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में उदाहरण पेश करते हुए कहा कि कई बार सामुदायिक भाईचारे और सद्भाव के लिए कुछ निर्णय जरूरी होते हैं। यहां मामला रद्द करने से सामुदायिक भाईचारा और सद्भाव बढ़ेगा। ऐसे में इस एफआईआर को रद्द किया जाए।
यह है मामला
याचिकाकर्ता शिक्षा विभाग में कंप्यूटर शिखक है और उन्होंने फैसबुक पर एक पोस्ट डाली। इस पोस्ट में कथित तौर पर एक जाति विशेष के लिए अपमानजनक टिप्पणी थी। मामला तब और अधिक गंभीर हो गया जब इस मामले को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। इसके बाद 28 फरवरी 2017 को याची को सस्पेंड कर दिया गया और 9 मार्च को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई।
विज्ञापन
याचिका दाखिल करते हुए शिक्षक सरफराज़ अंजुम की ओर से एडवोकेट मोहम्मद अरशद ने हाईकोर्ट के सामने दलीलें रखीं। अरशद ने कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 2011 में हुई थी और तब से लेकर अब तक उनका कैरियर बेदाग रहा है। अभी तक एसीआर में ज्यादातर एंट्री एक्सीलेंट की हैं। राजनीति चमकाने के लिए उनकी पोस्ट को मुद्दा बनाया गया और उन पर एफआईआर दर्ज करवा दी गई।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता ने कहा कि यह एफआईआर दो समुदायों के बीच तनाव पैदा कर उसका राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास है जो पूरा नहीं होने देना चाहिए। याची ने कहा कि इस मामले के बाद उसको सस्पेंड भी कर दिया गया जो गलत है। जो टिप्पणी याचिकाकर्ता ने फेसबुक पर डाली थी वह कॉपी पेस्ट थी। जो टिप्पणी की गई थी वह सामान्य वर्ग में बेहद साधारण थी। किसी भी प्रकार की गाली या अभद्रता का प्रयोग नहंी था। याची ने बताया कि इसके बाद एक पंचायत भी बुलाई गई थी जिसमें 36 बिरादरी शामिल थी। लेकिन तब भी दुर्व्यवहार की कोई बात नहीं हुई। इस मामले में याची को फंसाने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
ऐसे में रोशन लाल व अन्य द्वारा दर्ज 9 मार्च 2017 की एफआईआर रद्द की जाए। इसी बीच दोनों पक्षों के बीच समझौते की दलील दी गई। इसका सरकारी वकील ने यह कहते हुए विरोध किया कि पूरे समुदाय के हुए अपमान केलिए कोई एक आदमी समझौता नहीं कर सकता है इसलिए एफआईआर रद्द न की जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में उदाहरण पेश करते हुए कहा कि कई बार सामुदायिक भाईचारे और सद्भाव के लिए कुछ निर्णय जरूरी होते हैं। यहां मामला रद्द करने से सामुदायिक भाईचारा और सद्भाव बढ़ेगा। ऐसे में इस एफआईआर को रद्द किया जाए।
यह है मामला
याचिकाकर्ता शिक्षा विभाग में कंप्यूटर शिखक है और उन्होंने फैसबुक पर एक पोस्ट डाली। इस पोस्ट में कथित तौर पर एक जाति विशेष के लिए अपमानजनक टिप्पणी थी। मामला तब और अधिक गंभीर हो गया जब इस मामले को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। इसके बाद 28 फरवरी 2017 को याची को सस्पेंड कर दिया गया और 9 मार्च को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई।