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सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने रद्द कीं पंजाब के 18 CPS की नियुक्तियां

Sat, 13 Aug 2016 10:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 13 Aug 2016 10:54 AM IST
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punjab haryana highcourt cancelled appointment of chief parliamentary secretary in punjab
कोर्ट
सीपीएस की नियुक्तियों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को बड़ा झटका दिया है। ये नियुक्तियां 2012 में की गई थीं। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में 18 मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए रद कर दिया। जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस रामेन्द्र जैन की खंडपीठ ने इस मामले में पिछले साल जुलाई माह के दौरान सुरक्षित किया गया फैसला सुनाते हुए कहा कि पंजाब सरकार द्वारा यह नियुक्तियां असंवैधानिक तरीके से निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करके की गईं हैं।
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उल्लेखनीय है कि पंजाब में सीपीएस की नियुक्तियों के खिलाफ वर्ष 2012 में ही एडवोकेट एचसी अरोड़ा और एडवोकेट जगमोहन सिंह भट्टी ने अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर कर चुनौती दी थी। तीन वर्षों तक इन दोनों याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई चली और पिछली साल 28 जुलाई को हाईकोर्ट ने इन पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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दरअसल पंजाब सरकार ने वर्ष 2012 में 19 संसदीय सचिवों की नियुक्ति की थी, जिसके खिलाफ उसी वर्ष एडवोकेट एचसी अरोड़ा और एडवोकेट जगमोहन सिंह भट्टी ने याचिकाओं के जरिए इन नियुक्तियों को पर सवाल उठाया। दोनों याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में कहा कि भारत के संविधान में मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है।
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संविधान के 91 वें संशोधन में केंद्र और राज्य सरकार में मंत्रियों की संख्या सीमित कर दी गयी थी, जिसके तहत राज्य विधानसभाओं में विधायकों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक मंत्री नहीं नियुक्त किये जा सकते हैं। दोनों याचिकाओं में कहा गया था कि पंजाब सरकार ने मंत्रियों की नियुक्तियों के बाद मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्तियां कर दी हैं और इन्हें भी मंत्री पद के बराबर सुविधाएं दी जा रही हैं। इससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

याचिकाओं में हिमाचल हाईकोर्ट के वर्ष 2004 में दिए उस फैसले का भी हवाला दिया गया जिसमें हिमाचल हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को खारिज कर दिया था। इन याचिकाओं के जवाब में पंजाब सरकार ने अपना पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट एके गांगुली की सेवाएं ली थी।

इन मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति हाईकोर्ट ने रद्द की

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अदालत का फैसला
सोहन सिंह ठंडल, चौधरी नंदलाल, बलवीर सिंह घुनस, देश राज धुग्गा, हरमीत सिंह संधू, मंतर सिंह बरा, बीबी महिंदर कौर जोश, अमरजीत सिंह (इनकी अचानक मृत्यु के बाद इनकी पत्नी सुरजीत कौर शाही), अविनाश चंद्र, केडी भंडारी, इंदरबीर सिंह बुलारिया (हाल ही में त्यागपत्र दे चुके हैं), अमरपाल सिंह अजनाला, गुरचरण सिंह बब्बेहाली, विरसा सिंह वल्टोहा, एनके शर्मा, निसारा खातून, नवजोत कौर सिद्धू, प्रकाश चंद गर्ग, पवन कुमार टीनू, सुरूप चंद सिंगला और सोमनाथ।

इस साल बनाए गए सीपीएस पर भी लटकी तलवार
पंजाब सरकार द्वारा गत अप्रैल माह में सात अन्य मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति की गई है। शुक्त्रस्वार को 18 सीपीएस के बारे में आए हाईकोर्ट के फैसले का असर इन नियुक्तियों पर पड़ना भी लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि इन नियुक्तियों को भी एडवोकेट जगमोहन सिंह भट्टी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दे रखी है।

पंजाब सरकार ने जिन सात सीपीएस के नामों का ऐलान किया था, उनमें से परगट सिंह ने सीपीएस पद स्वीकार नहीं किया है जबकि बाकी छह सीपीएस गुरतेज सिंह घुरियाणा, मंजीत सिंह मियांविंड, दर्शन सिंह शिवालिक, गुरप्रताप सिंह वडाला, सुखजीत कौर साही और सीमा रानी शपथ ग्रहण कर चुके हैं।
 
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