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पासपोर्ट पर पिता के नाम को लेकर हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, देखिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 20 Nov 2016 07:23 PM IST
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पासपोर्ट पर पिता के नाम को लेकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले में बड़ा फैसला दिया है। देखिए आपके बड़े काम आ सकता है। दरअसल, पासपोर्ट पर पिता के नाम को लेकर हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि पासपोर्ट पर जैनेटिक पिता का नाम अनिवार्य नहीं है। यदि आवेदक के पिता सौतेले हैं तो ऐसे में आवेदन करते हुए सौतेले पिता का नाम लिखा जा सकता है।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए कहा गया कि पानीपत निवासी याची की मां का 20 वर्ष पहले 1996 में तलाक हो चुका है। तलाक के समय मोहित की आयु 7 वर्ष और उसकी बड़ी बहन 9 वर्ष की थी। एक वर्ष बाद याची की मां ने दूसरा विवाह कर लिया था। तब से याची अपनी बड़ी बहन और मां के साथ सौतेले पिता के साथ ही रह रहा है।
उसके राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और यहां तक कि स्कूल के सर्टिफिकेट में भी मोहित के पिता के स्थान पर उसके सौतेले पिता का नाम ही लिखा हुआ है। जब याची ने पासपोर्ट अप्लाई किया तो पासपोर्ट कार्यालय ने उसका पासपोर्ट बनाए जाने से इनकार दिया और कहा कि वह पासपोर्ट में अपने वास्तविक पिता का नाम ही दर्ज करवाए।
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए कहा गया कि पानीपत निवासी याची की मां का 20 वर्ष पहले 1996 में तलाक हो चुका है। तलाक के समय मोहित की आयु 7 वर्ष और उसकी बड़ी बहन 9 वर्ष की थी। एक वर्ष बाद याची की मां ने दूसरा विवाह कर लिया था। तब से याची अपनी बड़ी बहन और मां के साथ सौतेले पिता के साथ ही रह रहा है।
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उसके राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और यहां तक कि स्कूल के सर्टिफिकेट में भी मोहित के पिता के स्थान पर उसके सौतेले पिता का नाम ही लिखा हुआ है। जब याची ने पासपोर्ट अप्लाई किया तो पासपोर्ट कार्यालय ने उसका पासपोर्ट बनाए जाने से इनकार दिया और कहा कि वह पासपोर्ट में अपने वास्तविक पिता का नाम ही दर्ज करवाए।
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सौतेले पिता का नाम दर्ज करने पर भी बड़ा फैसला
पासपोर्ट
सौतेले पिता का नाम दर्ज करने पर उसे पासपोर्ट जारी नहीं किया जाएगा। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उसके लगभग सभी दस्तावेजों पर पिता के स्थान पर उसके सौतेले पिता का नाम ही लिखा है। ऐसे में अब वह अपने वास्तविक पिता का नाम नहीं लिख सकता।
यह भी बताया गया कि कुछ समय पहले उसकी बहन ने भी सौतेले पिता का नाम ही पिता के स्थान पर लिखा था, तब पासपोर्ट कार्यालय ने बिना कोई आपत्ति पासपोर्ट जारी कर दिया था, लेकिन उस पर ऐसी शर्त लगा उसे परेशान किया जा रहा है।
जस्टिस आरके जैन ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता जब 7 वर्ष का था तब से सौतेला पिता ही उसकी देखभाल कर रहे हैं और लगभग सभी सरकारी दस्तावेजों पर यही नाम दर्ज है।
ऐसे में पासपोर्ट कार्यालय ऐसी कोई शर्त नहीं लगा सकता है। लिहाजा हाईकोर्ट ने पासपोर्ट कार्यालय को एक महीने के भीतर याचिकाकर्ता को पासपोर्ट जारी करने के निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है।
यह भी बताया गया कि कुछ समय पहले उसकी बहन ने भी सौतेले पिता का नाम ही पिता के स्थान पर लिखा था, तब पासपोर्ट कार्यालय ने बिना कोई आपत्ति पासपोर्ट जारी कर दिया था, लेकिन उस पर ऐसी शर्त लगा उसे परेशान किया जा रहा है।
जस्टिस आरके जैन ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता जब 7 वर्ष का था तब से सौतेला पिता ही उसकी देखभाल कर रहे हैं और लगभग सभी सरकारी दस्तावेजों पर यही नाम दर्ज है।
ऐसे में पासपोर्ट कार्यालय ऐसी कोई शर्त नहीं लगा सकता है। लिहाजा हाईकोर्ट ने पासपोर्ट कार्यालय को एक महीने के भीतर याचिकाकर्ता को पासपोर्ट जारी करने के निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है।