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मजीठिया को बड़ा झटका: हाईकोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका, अब किसी भी वक्त हो सकती गिरफ्तारी

Mon, 24 Jan 2022 05:04 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 24 Jan 2022 05:04 PM IST
सार

वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ 20 दिसंबर को पंजाब पुलिस ने नशे की तस्करी के आरोप में विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी।

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Punjab Haryana High Court will hear petition filed for bail of Akali leader Bikram Majithia
बिक्रम मजीठिया। - फोटो : फाइल

विस्तार

नशे की तस्करी मामले में फंसे वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को चुनाव से पहले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा झटका देते हुए अग्रिम जमानत की मांग वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोप बेहद गंभीर हैं और याची से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। इस संबंध में हाईकोर्ट का विस्तृत फैसला आना अभी बाकी है। 

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हाईकोर्ट ने पांच जनवरी को मजीठिया को अंतरिम जमानत दे दी थी, अब याचिका खारिज होने के चलते यह अंतरिम जमानत भी समाप्त हो गई है। अब उनकी गिरफ्तारी किसी भी समय हो सकती है। सोमवार को मजीठिया की अग्रिम जमानत याचिका पर तीन घंटे तक सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने लंबी बहस के बाद और दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोपहर एक बजे इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद शाम चार बजे फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने मजीठिया की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। 
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मजीठिया के खिलाफ मोहाली में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में मजीठिया ने पहले मोहाली की जिला अदालत में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। लिहाजा मजीठिया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत मांगी थी। 
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हाईकोर्ट ने पांच जनवरी को मजीठिया को अंतरिम जमानत देते हुए उन्हें जांच में शामिल होने के आदेश दिए थे, साथ ही मामले में पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांग लिया था। 10 जनवरी को हुई सुनवाई में पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि चाहे मजीठिया मामले की जांच में शामिल हो चुके हैं लेकिन वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।


मजीठिया ने अर्जी दायर कर लगाए थे आरोप
याचिका में मजीठिया ने अर्जी दायर कर आरोप लगाया था कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नहीं बल्कि अपमानित करने के लिए उन्हें इस मामले में फंसा कर गिरफ्तार करना चाहती है। मजीठिया ने अपनी सफाई में कहा था कि ड्रग तस्कर जगदीश भोला ने कही भी यह नहीं कहा था कि उसकी मजीठिया से बात हुई है। मजीठिया ने डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय पर भी आरोप लगाए थे कि उनकी डीजीपी पद पर नियुक्ति ही याची पर मामला दर्ज करने के लिए की गई थी। सोमवार को हाईकोर्ट ने मजीठिया की इन दलीलों को भी खारिज कर दिया है।

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