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हरियाणा सरकार को झटका: निजी क्षेत्र में स्थानीय निवासियों को 75 फीसदी आरक्षण के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक

Thu, 03 Feb 2022 12:35 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 03 Feb 2022 12:35 PM IST
सार

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस आरक्षण को चुनौती देने वाली फरीदाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की याचिका पर हरियाणा सरकार से जवाब तलब कर लिया है।

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Punjab Haryana High Court stayed decision of haryana government to give 75 percent reservation to state residents in private sector
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की नौकरियों में प्रदेश के निवासियों को दिए गए 75 प्रतिशत आरक्षण पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। फरीदाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया था कि निजी क्षेत्र में योग्यता और कौशल के अनुसार लोगों का चयन किया जाता है। यदि नियोक्ताओं से कर्मचारी को चुनने का अधिकार ले लिया जाएगा तो उद्योग कैसे आगे बढ़ सकेंगे। 

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हरियाणा सरकार का 75 प्रतिशत आरक्षण का फैसला योग्य लोगों के साथ अन्याय है। यह कानून उन युवाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन है जो अपनी शिक्षा और योग्यता के आधार पर भारत के किसी भी हिस्से में नौकरी करने को स्वतंत्र हैं। याची ने कहा कि यह कानून योग्यता के बदले रिहायश के आधार पर निजी क्षेत्र में नौकरी पाने की पद्धति को शुरू करने का प्रयास है। ऐसा हुआ तो हरियाणा में निजी क्षेत्र में रोजगार को लेकर अराजकता की स्थिति पैदा हो जाएगी। 
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यह कानून निजी क्षेत्र के विकास को भी बाधित करेगा और इसके कारण राज्य से उद्योग पलायन भी आरंभ कर सकते हैं। याची ने कहा कि यह कानून वास्तविक तौर पर कौशलयुक्त युवाओं के अधिकारों का हनन है। 75 फीसदी नौकरियां आरक्षित करने के लिए 2 मार्च, 2021 को लागू अधिनियम और 6 नवंबर, 2021 की अधिसूचना संविधान, संप्रभुता के प्रावधानों के खिलाफ है।
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रोजगार अधिनियम 2020 को सिरे से खारिज करने की याचिका में मांग की गई है। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ ने याचिका पर हरियाणा सरकार से जवाब तलब कर लिया था। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने जवाब दाखिल करते हुए कहा कि संविधान के जिस प्रावधान का हवाला देकर यह एसोसिएशन हाईकोर्ट पहुंची हैं वह नागरिकों के लिए है, कंपनी पर वह लागू ही नहीं होता। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अब याचिका को एडमिट करते हुए आरक्षण के प्रावधान पर रोक लगा दी है।

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