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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab-Haryana High Court states that alimony cannot denied to wife on ground of adultery committed in past

Highcourt Decision: पूर्व में किए व्यभिचार के आधार पर गुजारा भत्ता से नहीं किया जा सकता इनकार

Tue, 11 Oct 2022 01:33 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 11 Oct 2022 01:33 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची को याचिका दाखिल शुरू से ही इस पत्र की जानकारी थी लेकिन एविडेंस के समय इसे पेश नहीं किया गया। ऐसे में अब इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।

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Punjab-Haryana High Court states that alimony cannot denied to wife on ground of adultery committed in past
court - फोटो : istock

विस्तार

अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि पूर्व में किए गए व्यभिचार को आधार बनाकर पत्नी को गुजारा भत्ता से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मेंटेनेंस की याचिका दाखिल करने से पहले या कुछ समय बाद व्यभिचार की स्थिति में पति के दावे पर विचार किया जा सकता है।

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रेवाड़ी निवासी पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए फैमिली कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें पति के पत्नी द्वारा लिखे गए एक पत्र की हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से जांच करवाने की मांग खारिज कर दी गई थी। याची ने बताया कि उसका विवाह 2004 में हुआ था और 2005 में उसकी पत्नी गर्भवती हुई थी। इस दौरान उसने गर्भ गिराने की बात कहते हुए एक पत्र में लिखा था कि उसके पेट में पलने वाला बच्चा याची का नहीं है। इसके बाद दोनों साथ रहे और 3 बच्चे हुए। 2017 में महिला ने मेंटेनेंस के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। 
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फैमिली कोर्ट में एविडेंस समाप्त होने के बाद पति ने अतिरिक्त एविडेंस के तौर पर हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से पत्र की जांच करवाने की मांग की थी जिसे फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची को याचिका दाखिल शुरू से ही इस पत्र की जानकारी थी लेकिन एविडेंस के समय इसे पेश नहीं किया गया। ऐसे में अब इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि भूतकाल में लिखे गए इस पत्र, जिसके बाद कई साल दोनों साथ रहे, को आधार बनाकर कैसे गुजारा भत्ता से इनकार किया जा सकता है। व्यभिचार की घटना पुरानी है और याचिका दाखिल करते हुए या इसके बाद व्यभिचार का सबूत पेश नहीं किया गया। ऐसे में कोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

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