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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Haryana High Court Statement on Space for Ambulence

भले हो वीआईपी आया हो, एंबुलेंस को देनी होगी निकलने की जगह, हर जान कीमती है: हाईकोर्ट

Sat, 18 Jan 2020 10:46 AM IST
खुशबू गोयल विवेक शर्मा. अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा. अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 18 Jan 2020 10:46 AM IST
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Punjab Haryana High Court Statement on Space for Ambulence
प्रतीकात्मक तस्वीर
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट कर दिया कि भले ही वीआईपी विजिट हो, लेकिन एंबुलेंस को किसी भी स्थिति में नहीं रोका जाना चाहिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने तीन माह में सभी एंबुलेंस में डैशबोर्ड कैमरा लगाना सुनिश्चित करने के आदेश भी यूटी प्रशासन को जारी किए हैं।
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सुनवाई के दौरान जस्टिस राजीव शर्मा ने कहा कि वह जब सुबह आ रहे थे उन्होंने देखा कि एक एंबुलेंस भीड़ में फंसी थी और रास्ते का इंतजार कर रही थी। शहर में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि ट्रैफिक अधिक होने के कारण एंबुलेंस फंस जाती हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि वीआईपी विजिट के कारण भी कई बार एंबुलेंस फंस जाती हैं।
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कोर्ट ने चंडीगढ़ पुलिस को यह आदेश दिया कि वह सुनिश्चित करें कि वीआईपी विजिट के कारण एंबुलेंस न फंसे। कोर्ट ने कहा कि मानव जीवन बहुत कीमती है और हमें किसी भी स्थिति में उसे बचाना होगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि शहर की सभी एंबुलेंस में डैशबोर्ड कैमरा लगाया जाए।
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इससे ऐसे लोगों की पहचान करने में आसानी होगी जो इसका मार्ग बाधित करते हैं और उनपर जुर्माना लगाया जा सकेगा।

जो ऐसा नहीं करते हैं उनका चालान किया जाए

यूटी प्रशासन ने कहा कि यह मुश्किल कार्य है तो हाईकोर्ट ने कहा कि इसे अनिवार्य किया जाए और जो ऐसा नहीं करते हैं उनका चालान किया जाए। यह काम प्रशासन को नहीं करना बल्कि यह हो गया है यह सुनिश्चित करना है।

चार माह में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर होगी तीसरी आंख से निगरानी
चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया कि शहर में 105 (ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रीडर) एएनपीआर युक्त कैमरे लगाने की योजना है। यह शहर के मुख्य स्थानों पर लगाए जाएंगे और नियम तोड़ने वालों का नंबर रीड कर उन्हें चालान भेजे जा सकेंगे। इसके लिए कुल 18 माह का समय चाहिए।

हाईकोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि इतने से काम के लिए इतना लंबा समय नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने यह काम 4 माह में पूरा करना सुनिश्चित करने के आदेश दिए।
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