{"_id":"5e16c14b8ebc3e87dc406fd7","slug":"punjab-haryana-high-court-statement-on-panchkula-violence-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा सरकार की नाकामी का नतीजा थी पंचकूला हिंसा, समय पर कार्रवाई होती तो ऐसा नहीं होता: गुप्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा सरकार की नाकामी का नतीजा थी पंचकूला हिंसा, समय पर कार्रवाई होती तो ऐसा नहीं होता: गुप्ता
Thu, 09 Jan 2020 11:37 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 09 Jan 2020 11:37 AM IST
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फाइल फोटो
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राम रहीम को सजा होने के बाद पंचकूला में हुई हिंसा के लिए सरकार को जिम्मेदार बताते हुए सरकार से नुकसान की भरपाई करवाने की कोर्ट मित्र ने दलील दी। अनुपम गुप्ता ने कहा कि सरकार की नाकामी का नतीजा है कि अदालत पर दबाव बनाने के लिए इतनी बड़ी संख्या में डेरा प्रेमी एकत्रित हुए और सजा के आदेश के बाद हिंसा हुई। सुनवाई शुरू होते ही सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने दलीलें रखनी शुरू की। कहा कि पंचकूला में हजारों डेरा प्रेमी एकत्रित हुए और सरकार केवल इंतजार करती रही।
सरकार डेरा के साथ कदम से कदम बढ़ा रही थी और जब हिंसा आरंभ हुई तो लाठियां और गोलियां चली। यह सब सरकार की नाकामी का नतीजा है। इस पर हाईकोर्ट की फुल बेंच ने पूछा कि देश के प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्वक तरीके से अपनी मांगों को लेकर एकत्रित होने का अधिकार है गुप्ता ने कहा कि तब हजारों की संख्या में यह डेरा प्रेमी सिर्फ इसीलिए जुटे थे ताकि साध्वी यौन शोषण के मामले में फैसला सुनाने जा रही अदालत पर दबाव बनाया जाए। इसीलिए फैसला डेरा मुखी के विरुद्ध आने के बाद डेरा समर्थक हिंसक हुए तोड़फोड़ और आगजनी की।
इन दंगों में हुई सरकारों और निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई किससे की जाए हाईकोर्ट अब इस मुद्दे पर सभी पक्षों से दलीलें सुन रहा है। बुधवार को अनुपम गुप्ता ने ढाई घंटों तक अपना पक्ष रखा और कहा कि इस पुरे मामले में सरकार की नाकामी ही सामने आई है इसलिए इन दंगों के दौरान हुए नुकसान के लिए सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। इससे पहले भी एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा था कि यह सीधे तौर पर सरकार की नाकामी है। इस पुरे मामले को दो फेज में देखा जाना चाहिए।
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पहला फेज जब लाखों डेरा प्रेमी पंचकूला में तीन दिन तक बैठे रहे, तब सरकार ने इन्हे हटाने की कोइ कोशिश तक नहीं की। दूसरा फेज जब डेरामुखी को सजा सुना दी गई तब इसी सरकार ने दंगों में शामिल डेरा प्रेमियों पर कड़ी कार्रवाई की। अगर पहले ही सरकार ने ठोस कार्रवाई की जाती तो बाद में हुए नुकसान को रोका जा सकता था।
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सरकार डेरा के साथ कदम से कदम बढ़ा रही थी और जब हिंसा आरंभ हुई तो लाठियां और गोलियां चली। यह सब सरकार की नाकामी का नतीजा है। इस पर हाईकोर्ट की फुल बेंच ने पूछा कि देश के प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्वक तरीके से अपनी मांगों को लेकर एकत्रित होने का अधिकार है गुप्ता ने कहा कि तब हजारों की संख्या में यह डेरा प्रेमी सिर्फ इसीलिए जुटे थे ताकि साध्वी यौन शोषण के मामले में फैसला सुनाने जा रही अदालत पर दबाव बनाया जाए। इसीलिए फैसला डेरा मुखी के विरुद्ध आने के बाद डेरा समर्थक हिंसक हुए तोड़फोड़ और आगजनी की।
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इन दंगों में हुई सरकारों और निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई किससे की जाए हाईकोर्ट अब इस मुद्दे पर सभी पक्षों से दलीलें सुन रहा है। बुधवार को अनुपम गुप्ता ने ढाई घंटों तक अपना पक्ष रखा और कहा कि इस पुरे मामले में सरकार की नाकामी ही सामने आई है इसलिए इन दंगों के दौरान हुए नुकसान के लिए सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। इससे पहले भी एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा था कि यह सीधे तौर पर सरकार की नाकामी है। इस पुरे मामले को दो फेज में देखा जाना चाहिए।
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पहला फेज जब लाखों डेरा प्रेमी पंचकूला में तीन दिन तक बैठे रहे, तब सरकार ने इन्हे हटाने की कोइ कोशिश तक नहीं की। दूसरा फेज जब डेरामुखी को सजा सुना दी गई तब इसी सरकार ने दंगों में शामिल डेरा प्रेमियों पर कड़ी कार्रवाई की। अगर पहले ही सरकार ने ठोस कार्रवाई की जाती तो बाद में हुए नुकसान को रोका जा सकता था।