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ट्रिब्यूनल के फैसले पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, तकनीकी अड़चन के कारण न्याय का गला न घोटें अदालतें
Fri, 07 Jun 2019 02:48 PM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 07 Jun 2019 02:48 PM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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मृतक की आश्रित द्वारा दाखिल याचिका को मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा तकनीकी आधार पर खारिज करने पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतें तकनीकी कारणों के कारण न्याय का गला न घोटें। कल्याणकारी कानून का लाभ देते हुए लकीर का फकीर बनने की जरूरत नहीं है बल्कि जब तक बहुत ही जरूरी न हो तब तक तकनीकी कारणों से याचिका को खारिज करने से बचना चाहिए।
याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ निवासी मोनी सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके पति एक दुकान पर हेड कुक का काम करते थे। 2009 में उनको एक गाड़ी ने सेक्टर 16 स्टेडियम के पास टक्कर मार दी थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतें तकनीकी कारणों के कारण न्याय का गला न घोटें। कल्याणकारी कानून का लाभ देते हुए लकीर का फकीर बनने की जरूरत नहीं है बल्कि जब तक बहुत ही जरूरी न हो तब तक तकनीकी कारणों से याचिका को खारिज करने से बचना चाहिए।
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याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ निवासी मोनी सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके पति एक दुकान पर हेड कुक का काम करते थे। 2009 में उनको एक गाड़ी ने सेक्टर 16 स्टेडियम के पास टक्कर मार दी थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
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इस मामले में जब मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की गई तो तकनीकी आधार पर उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट में जो याचिका दाखिल की गई थी वह भी 66 दिन देरी से दाखिल की गई थी, जिसके चलते याचिका को खारिज करने की प्रतिवादी पक्ष ने अपील की थी।
हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करने से इनकार करते हुए कहा कि कल्याणकारी कानून का उद्देश्य पीड़ितों की मदद करना होता है। जब किसी के घर का अकेला कमाने वाला मर जाता है तो परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाती है। ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर याचिका खारिज करना गलत है।
ट्रिब्यूनल ने भी यह गलती की जिससे न्याय की हत्या हुई। हाईकोर्ट ने अब मामले को दोबारा मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल को भेजते हुए इस पर नए सिरे से सुनवाई कर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करने से इनकार करते हुए कहा कि कल्याणकारी कानून का उद्देश्य पीड़ितों की मदद करना होता है। जब किसी के घर का अकेला कमाने वाला मर जाता है तो परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाती है। ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर याचिका खारिज करना गलत है।
ट्रिब्यूनल ने भी यह गलती की जिससे न्याय की हत्या हुई। हाईकोर्ट ने अब मामले को दोबारा मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल को भेजते हुए इस पर नए सिरे से सुनवाई कर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।