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स्कूल फीसः हाईकोर्ट ने कहा, किसी भी निर्णय से पहले अभिभावकों का पक्ष सुनना भी जरूरी
Tue, 23 Jun 2020 10:17 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 23 Jun 2020 10:17 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
हरियाणा में निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस के अलावा अन्य किसी भी तरह की फीस की वसूली प्रकरण में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने निजी स्कूलों को बगैर कोई राहत देते हुए अभिभावकों का पक्ष भी सुने जाने को महत्वपूर्ण करार दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब सात सितंबर को होगी। सोमवार को जस्टिस रामेंद्र जैन ने निजी स्कूलों की संस्था सर्व विद्यालय संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहाकि मामले में अभिभावकों का पक्ष भी सुना जाना जरूरी है।
संघ के आपत्ति जताने पर हाईकोर्ट ने कहा कि अभिभावक भी इस मामले में एक पक्ष हैं। ऐसे में उन्हें सुने बिना कैसे कोई फैसला किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि निजी स्कूलों को फीस वसूली की इतनी जल्दी क्यों है। बहस के बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई 7 सितंबर तक स्थगित कर दी। संघ ने कहा कि मामले की सुनवाई जुलाई के पहले सप्ताह में हो सकती है, जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में कोई जल्दी नहीं है।
सर्व विद्यालय संघ ने याचिका में कहा है कि लॉकडाउन से सिर्फ अभिभावक ही प्रभावित नहीं हुए हैं बल्कि निजी स्कूल भी प्रभावित हुए हैं। वहीं अभिभावकों की संस्था ने भी एडवोकेट प्रदीप रापड़िया के जरिये अर्जी दायर कर कहा है कि लॉकडाउन के कारण अभिभावकों की आय भी प्रभावित हुई है। बहुत सारे अभिभावक या तो बेरोजगार हो गए हैं या आय बहुत कम बची है। सभी निजी शिक्षण संस्थाएं गैर. लाभ के इरादे से स्थापित की गई हैं।
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निजी स्कूलों के पास करोड़ों का रिजर्व फंड है। अर्जी में हरियाणा सरकार के उन आदेशों का भी हवाला दिया गया है, जिनके अनुसार प्रत्येक निजी स्कूल को हर साल ऑडिट बैलेंस सीट निदेशालय के समक्ष जमा कराने के आदेश दिए हुए हैं। अधिकांश निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग के समक्ष ऑडिट बैलेंस सीट जमा नहीं कराई है। पहले इन निजी स्कूलों से बैलेंस शीट मांगी जाए।
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संघ के आपत्ति जताने पर हाईकोर्ट ने कहा कि अभिभावक भी इस मामले में एक पक्ष हैं। ऐसे में उन्हें सुने बिना कैसे कोई फैसला किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि निजी स्कूलों को फीस वसूली की इतनी जल्दी क्यों है। बहस के बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई 7 सितंबर तक स्थगित कर दी। संघ ने कहा कि मामले की सुनवाई जुलाई के पहले सप्ताह में हो सकती है, जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में कोई जल्दी नहीं है।
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सर्व विद्यालय संघ ने याचिका में कहा है कि लॉकडाउन से सिर्फ अभिभावक ही प्रभावित नहीं हुए हैं बल्कि निजी स्कूल भी प्रभावित हुए हैं। वहीं अभिभावकों की संस्था ने भी एडवोकेट प्रदीप रापड़िया के जरिये अर्जी दायर कर कहा है कि लॉकडाउन के कारण अभिभावकों की आय भी प्रभावित हुई है। बहुत सारे अभिभावक या तो बेरोजगार हो गए हैं या आय बहुत कम बची है। सभी निजी शिक्षण संस्थाएं गैर. लाभ के इरादे से स्थापित की गई हैं।
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निजी स्कूलों के पास करोड़ों का रिजर्व फंड है। अर्जी में हरियाणा सरकार के उन आदेशों का भी हवाला दिया गया है, जिनके अनुसार प्रत्येक निजी स्कूल को हर साल ऑडिट बैलेंस सीट निदेशालय के समक्ष जमा कराने के आदेश दिए हुए हैं। अधिकांश निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग के समक्ष ऑडिट बैलेंस सीट जमा नहीं कराई है। पहले इन निजी स्कूलों से बैलेंस शीट मांगी जाए।