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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Haryana High Court Statement in Case of Rohtak Gang rape

दुश्मन से बदला लेने के लिए कोई भी बाप बेटी की इज्जत से समझौता नहीं कर सकता: हाईकोर्ट

Thu, 09 Jan 2020 09:49 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 09 Jan 2020 09:49 AM IST
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Punjab Haryana High Court Statement in Case of Rohtak Gang rape
फाइल फोटो
रोहतक में सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों की अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता कि पिता अपनी दुश्मन के चलते बेटी की इज्जत से समझौता करेगा।
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कोर्ट ने हालांकि दोषी की सजा को घटा कर 14 साल से 10 साल कर दिया। मामला 2010 का है जब पीड़िता 25 अक्तूबर को स्कूल के लिए निकली थी। इस दौरान धीरज व अन्य एक वैन में आए और उसे स्कूल छोड़ने की बात कह गाड़ी में बैठा लिया। इसके बाद वे उसे सुनसान जगह ले गए, जहां पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और वापस वहीं छोड़ दिया, जहां से उठाया था।
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अगले दिन पीड़िता ने परिवार को सारी बात बताई, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई और धीरज को 21 जुलाई 2014 को रोहतक सेशन कोर्ट ने 14 साल की सजा सुनाई। इसी सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याची ने कहा कि पीड़िता ने पहले बयान दिया, चलती वैन में उसके साथ दुष्कर्म हुआ। बाद में कहा कि सुनसान जगह ले जाकर दुष्कर्म हुआ। साथ ही यह दलील भी दी कि एफआईआर उस दिन नहीं, बल्कि अगले दिन दर्ज करवाई गई।
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हाईकोर्ट ने याची का पक्ष सुनने के बाद सभी दलीलें खारिज करते हुए कहा कि जिस लड़की से दुष्कर्म हुआ हो, वह सभी बातें एफआईआर में सटीक बता पाए यह जरूरी नहीं है। यौन अपराध के मामलों में सबूतों का गणित की तरह सटीक होना भी जरूरी नहीं है। जहां तक बात रही देरी की तो इस तरह के मामलों में पीड़िता का घर वालों को बता पाना मुश्किल होता है और परिवार को समाज व इज्जत को देखते हुए निर्णय लेने में समय लगता है। खास तौर पर जब बात जवान बिन ब्याही बेटी की हो।

याची ने दलील दी कि उनका पीड़िता के पिता के साथ विवाद चल रहा था, इसलिए ऐसा किया गया। इस दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता। कोई बाप अपनी और अपनी बेटी की इज्जत को दांव पर लगाकर इस तरह का काम करेगा। हालांकि कोर्ट ने कहा कि याची आठ साल से लगातार जेल में है, ऐसे में उसका बर्ताव भी ठीक रहा, इसलिए उसकी सजा को घटाया जाना चाहिए। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने सजा को 14 साल से घटा कर 10 साल कर दिया।
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