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Highcourt: पंजाब में दागी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई... हाईकोर्ट ने सरकार से तलब किया जवाब
Thu, 12 Oct 2023 02:23 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 12 Oct 2023 02:23 PM IST
सार
पंजाब के कई जिलों में पीपीएस अधिकारियों को एसएसपी नियुक्त किए जाने पर भी हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा करना तो सीधे तौर पर इंडियन पुलिस सर्विस रूल्स का उल्लंघन है। पंजाब में कई जिलों में कैसे पीपीएस अधिकारियों की इस पद पर नियुक्ति कर दी गई।
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
विस्तार
पंजाब में एसएसपी पद पर पीपीएस अधिकारियों को नियुक्त करने और प्रदेश के दागी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब व केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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सिपाही सुरजीत सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मोगा के एसएसपी ने उसे बर्खास्त करने का आदेश दिया था। आईजी फिरोजपुर रेंज ने 23 नवंबर, 2018 में उसे बहाल करने को कहा था। इसके बावजूद उसे सेवा से बर्खास्त करने के आदेश का पालन किया गया। बर्खास्त करने के आदेश को चुनौती देते हुए उसने हाईकोर्ट को बताया था कि पुलिस में ऐसे कई अधिकारी हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं फिर भी वह सेवा में हैं। इसके चलते हाईकोर्ट ने ऐसे अधिकारियों की जानकारी तलब कर ली थी।
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हाईकोर्ट के आदेश पर पंजाब सरकार ने सैकड़ों ऐसे कर्मियों व अधिकारियों की सूची सौंपी थी। इस सूची में सिपाहियों से लेकर उच्च अधिकारियों तक के नाम मौजूद थे। इसके साथ ही पंजाब के कई जिलों में पीपीएस अधिकारियों को एसएसपी नियुक्त किए जाने पर भी हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा करना तो सीधे तौर पर इंडियन पुलिस सर्विस रूल्स का उल्लंघन है। पंजाब में कई जिलों में कैसे पीपीएस अधिकारियों की इस पद पर नियुक्ति कर दी गई।
याचिका विचाराधीन रहते इस मामले में पंजाब सरकार ने इस आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दे दी। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में सरकार ज्यादातर आदेश का पालन कर रिपोर्ट सौंप चुकी है। सिंगल बेंच के उठाए गए मुद्दों पर अभी सुनवाई जरूरी है। कोर्ट ने अब जनहित से जुड़े मुद्दों को एकल बेंच से अलग करते हुए अब इस मामले में जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई का निर्णय लिया है। अभी तक इस मामले में केवल पंजाब सरकार प्रतिवादी थी लेकिन अब हाईकोर्ट ने भारत सरकार को भी इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।