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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी: सुरक्षा की मांग पर रिश्ते की वैधता को देखना आवश्यक नहीं
Wed, 13 Oct 2021 07:24 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 13 Oct 2021 07:24 PM IST
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
प्रेमी जोड़े की सहमति संबंध में सुरक्षा की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा पर निर्णय देते हुए संबंध की वैधता को देखना आवश्यक नहीं है। हाईकोर्ट ने पहले से विवाहित पुरुष और उसकी प्रेमिका की सुरक्षा की मांग पर तरनतारन के एसएसपी को निर्णय लेने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए प्रेमी जोड़े ने बताया कि वह सहमति संबंध में रह रहे हैं। पुरुष पहले से विवाहित है। उसकी पत्नी ने कहा था कि वह विदेश जाकर याची को भी वहां बुला लेगी, लेकिन वह वादे से मुकर गई। अब वह अपनी प्रेमिका से विवाह करना चाहता है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि उसका तलाक नहीं हुआ है।
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सुरक्षा याचिका का विरोध करते हुए पत्नी की ओर से कहा गया कि यह जोड़ा विवाह कर चुका है और उनका एक बच्चा भी है। ऐसे में सहमति संबंध की झूठी दलील दी जा रही है और याचिका खारिज की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि सुरक्षा का अधिकार संविधान द्वारा दिया गया है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। साथ ही संविधान अपनी मर्जी से साथी चुनने का तथा पसंद के साथी के साथ रहने का अधिकार देता है। साथ ही कोर्ट को सुरक्षा से जुड़ी याचिका पर फैसला सुनाते हुए रिश्ते की वैधता को देखना आवश्यक नहीं है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने तरनतारन के एसएसपी को प्रेमी जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश जारी कर दिया।