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चंडीगढ़ प्रशासन को राहत, चुनावों पर रोक लगाने से हाईकोर्ट ने किया इनकार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 22 Nov 2016 09:56 PM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शहर में आगामी नगर निगम चुनावों का रास्ता साफ करते हुए फिलहाल इनपर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। हालांकि याचिका को लंबित रखते हुए इसपर अगली सुनवाई 28 नवंबर को तय की है।
मामेल में याचिका दाखिल करते हुए जगजीत सिंह कंग ने वार्ड नंबर 23 को तीसरी बार आरक्षित घोषित करने और वार्ड नंबर 9 को भी फिर से महिला के लिए आरक्षित करने को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि मनमाने तरीके से वार्डों में आरक्षण को लागू करने का फैसला किया गया है और इसके लिए किसी नीति का अनुसरण नहीं किया गया है। याची ने कहा कि नीति के तहत वार्डों को रोटेशन नीति के तहत आरक्षित करना चाहिए था जिसके चलते दोबारा किसी वार्ड को आरक्षित नहीं किया जा सकता है।
याची ने कहा कि वे खुद चुनाव लड़ना चाहते थे परंतु वार्ड फिर से महिला के लिए आरक्षित होने के चलते वे चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। इसी बीच वार्ड 23 पर प्रशासन ने जवाब दायर कर रिजर्व करने केफैसले को सही करार दिया। वार्ड नंबर 23 निवासी सतपाल गोयल की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूछा था कि क्यों न चुनाव पर रोक लगा दी जाए जिसकेबाद चुनाव पर संकट के बादल छाए थे। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2006 में वार्ड को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2011 में से महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित कर दिया गया। अब एक बार फिर वार्ड को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। याची सामान्य श्रेणी से है और इस वार्ड से चुनाव लड़ने का इच्छुक है।
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मामेल में याचिका दाखिल करते हुए जगजीत सिंह कंग ने वार्ड नंबर 23 को तीसरी बार आरक्षित घोषित करने और वार्ड नंबर 9 को भी फिर से महिला के लिए आरक्षित करने को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि मनमाने तरीके से वार्डों में आरक्षण को लागू करने का फैसला किया गया है और इसके लिए किसी नीति का अनुसरण नहीं किया गया है। याची ने कहा कि नीति के तहत वार्डों को रोटेशन नीति के तहत आरक्षित करना चाहिए था जिसके चलते दोबारा किसी वार्ड को आरक्षित नहीं किया जा सकता है।
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याची ने कहा कि वे खुद चुनाव लड़ना चाहते थे परंतु वार्ड फिर से महिला के लिए आरक्षित होने के चलते वे चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। इसी बीच वार्ड 23 पर प्रशासन ने जवाब दायर कर रिजर्व करने केफैसले को सही करार दिया। वार्ड नंबर 23 निवासी सतपाल गोयल की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूछा था कि क्यों न चुनाव पर रोक लगा दी जाए जिसकेबाद चुनाव पर संकट के बादल छाए थे। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2006 में वार्ड को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2011 में से महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित कर दिया गया। अब एक बार फिर वार्ड को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। याची सामान्य श्रेणी से है और इस वार्ड से चुनाव लड़ने का इच्छुक है।
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