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सुखना लेक से गाद निकालने को 73 करोड़ मांग भूल गया चंडीगढ़ प्रशासन, हाईकोर्ट ने फटकारा
Thu, 16 Jan 2020 11:44 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 16 Jan 2020 11:44 AM IST
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Sukhna Lake
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सूखती जा रही सुखना लेक को बचाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने प्रस्ताव तैयार कर केंद्र से 73.51 करोड़ की जो राशि मांगी थी, वह राशि क्यों नहीं दी गई। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के इस सवाल पर केंद्र के जवाब ने यूटी प्रशासन को घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। केंद्र ने बताया कि प्रशासन के प्रस्ताव में कुछ आपत्तियों के बारे 2009 में स्पष्टीकरण मांगा गया था जिसका आज तक जवाब नहीं मिला।
बुधवार को जैसे ही सुखना को लेकर सुनवाई आरंभ हुई तो हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब इस मामले को और नहीं लटकने दिया जाएगा। सुखना का मामला पिछले 11 साल से हाईकोर्ट में लंबित है और अब रोज सुनवाई कर इसका जल्द से जल्द निपटारा किया जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि वर्ष 2006 में चंडीगढ़ प्रशासन ने सुखना लेक को डीसिल्ट के जरिये गहरा करने और उसकी क्षमता को बढ़ाने की एक पूरी योजना बना प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था।
प्रस्ताव के जरिये कें द्र सरकार से 73.51 करोड़ रुपये जारी करने का आग्रह किया गया था। हाईकोर्ट ने पूछा कि वह राशि पिछले 11 वर्षों से केंद्र सरकार ने जारी क्यों नहीं की। इस पर केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि इस पूरे प्लान के बारे में केंद्र सरकार ने मार्च 2009 में कुछ आपत्तियां जताते हुए चंडीगढ़ प्रशासन से अधिक जानकारी देने को कहा था। उसका जवाब आज तक चंडीगढ़ प्रशासन ने दिया ही नहीं है।
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कैचमेंट एरिया में निर्माण को लेकर भी होगी सुनवाई
जस्टिस राजीव शर्मा ने बुधवार को 2009 से लेकर अभी तक जारी आदेशों का अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि मार्च 2011 में हाईकोर्ट ने कैचमेंट एरिया में निर्माण कार्यों पर रोक लगाई थी और अब उसी आदेश को आधार बना आगे सुनवाई होगी। साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा है कि मनसा देवी काम्प्लेक्स सेक्टर-1 का कुछ हिस्सा जो कैचमेंट एरिया में आता है क्या वहां कोई निर्माण कार्य हुए हैं।
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बुधवार को जैसे ही सुखना को लेकर सुनवाई आरंभ हुई तो हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब इस मामले को और नहीं लटकने दिया जाएगा। सुखना का मामला पिछले 11 साल से हाईकोर्ट में लंबित है और अब रोज सुनवाई कर इसका जल्द से जल्द निपटारा किया जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि वर्ष 2006 में चंडीगढ़ प्रशासन ने सुखना लेक को डीसिल्ट के जरिये गहरा करने और उसकी क्षमता को बढ़ाने की एक पूरी योजना बना प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था।
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प्रस्ताव के जरिये कें द्र सरकार से 73.51 करोड़ रुपये जारी करने का आग्रह किया गया था। हाईकोर्ट ने पूछा कि वह राशि पिछले 11 वर्षों से केंद्र सरकार ने जारी क्यों नहीं की। इस पर केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि इस पूरे प्लान के बारे में केंद्र सरकार ने मार्च 2009 में कुछ आपत्तियां जताते हुए चंडीगढ़ प्रशासन से अधिक जानकारी देने को कहा था। उसका जवाब आज तक चंडीगढ़ प्रशासन ने दिया ही नहीं है।
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कैचमेंट एरिया में निर्माण को लेकर भी होगी सुनवाई
जस्टिस राजीव शर्मा ने बुधवार को 2009 से लेकर अभी तक जारी आदेशों का अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि मार्च 2011 में हाईकोर्ट ने कैचमेंट एरिया में निर्माण कार्यों पर रोक लगाई थी और अब उसी आदेश को आधार बना आगे सुनवाई होगी। साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा है कि मनसा देवी काम्प्लेक्स सेक्टर-1 का कुछ हिस्सा जो कैचमेंट एरिया में आता है क्या वहां कोई निर्माण कार्य हुए हैं।