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आदेश के बावजूद एनसीआर में रेवड़ियों की तरह बांटे लाइसेंस, नोटिफाई बिना कैसे दे दिए: हाईकोर्ट
Wed, 05 Feb 2020 10:30 AM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 05 Feb 2020 10:30 AM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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एनसीआर में बिना नेचुरल कंजरवेशन जोन निर्धारित किए कॉलोनियों के लिए रेवड़ियों की तरह लाइसेंस बांटे जाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेश को हल्के में लेना और एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देना इतना भारी पड़ सकता है कि कोर्ट मुख्य सचिव को तलब कर लेगा। कोर्ट ने कहा कि यदि रवैया नहीं बदला तो अधिकारी परिणाम के लिए तैयार रहें।
रीजनल प्लान 2021 से जुड़ा हुए मामले में चंद्र शेखर मिश्रा की एनसीआर के लिए नेचुरल कंजरवेशन जोन निर्धारित करने को लेकर लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 16 जनवरी 2015 को एनसीआर में किसी भी प्रकार की सीएलयू पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सरकार ने निवेदन किया था कि सीएलयू पर रोक के कारण एनसीआर में विकास कार्य रुक जाएगा, ऐसे में इस रोक को हटाया जाए।
इस पर हाईकोर्ट ने इस रोक को हटा दिया था लेकिन साथ ही यह भी आदेश दिए थे कि यह सुनिश्चित कर कोई भी सीएलयू दिया जाए कि वह स्थान नेचुरल कंजरवेशन जोन में न हो। मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि अभी तक नेचुरल कंजरवेशन जोन अभी तक फाइनल नहीं हुआ है और हरियाणा सरकार ने रेवड़ियों की तरह सीएलयू लाइसेंस जारी किए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि हरियाणा सरकार हाईकोर्ट का मजाक बनाने में लगी हुई है।
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कोर्ट ने कहा कि यदि यही रवैया रहा तो नए लाइसेंस पर रोक लगाते हुए 2015 के बाद जारी सभी लाइसेंस इस याचिका पर आने वाले निर्णय पर निर्भर कर दिए जाएंगे। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकालने की प्रवृत्ति अधिकारी बंद करें वरना मुख्य सचिव को बुलाने में हाईकोर्ट गुरेज नहीं करेगा। कोर्ट ने अब हरियाणा सरकार को आखिरी मौका देते हुए 6989 नेचुरल कंजरवेशन जोन को नोटिफाई करने पर स्टेटस सौंपने के आदेश दिए हैं।
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रीजनल प्लान 2021 से जुड़ा हुए मामले में चंद्र शेखर मिश्रा की एनसीआर के लिए नेचुरल कंजरवेशन जोन निर्धारित करने को लेकर लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 16 जनवरी 2015 को एनसीआर में किसी भी प्रकार की सीएलयू पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सरकार ने निवेदन किया था कि सीएलयू पर रोक के कारण एनसीआर में विकास कार्य रुक जाएगा, ऐसे में इस रोक को हटाया जाए।
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इस पर हाईकोर्ट ने इस रोक को हटा दिया था लेकिन साथ ही यह भी आदेश दिए थे कि यह सुनिश्चित कर कोई भी सीएलयू दिया जाए कि वह स्थान नेचुरल कंजरवेशन जोन में न हो। मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि अभी तक नेचुरल कंजरवेशन जोन अभी तक फाइनल नहीं हुआ है और हरियाणा सरकार ने रेवड़ियों की तरह सीएलयू लाइसेंस जारी किए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि हरियाणा सरकार हाईकोर्ट का मजाक बनाने में लगी हुई है।
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कोर्ट ने कहा कि यदि यही रवैया रहा तो नए लाइसेंस पर रोक लगाते हुए 2015 के बाद जारी सभी लाइसेंस इस याचिका पर आने वाले निर्णय पर निर्भर कर दिए जाएंगे। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकालने की प्रवृत्ति अधिकारी बंद करें वरना मुख्य सचिव को बुलाने में हाईकोर्ट गुरेज नहीं करेगा। कोर्ट ने अब हरियाणा सरकार को आखिरी मौका देते हुए 6989 नेचुरल कंजरवेशन जोन को नोटिफाई करने पर स्टेटस सौंपने के आदेश दिए हैं।