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हाईकोर्ट की नसीहत: पिता की मूर्ति चौराहे पर लगाकर कौन सा सम्मान दे रहें, अपने घर पर लगाएं... रोहतक का मामला

Thu, 23 Jan 2025 03:34 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 23 Jan 2025 03:34 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने रोहतक के डीसी को आदेश दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के 18 जनवरी 2013 के फैसले के बाद रोहतक में स्थापित सभी मूर्तियों का विवरण दें। इसमें मूर्तियों की स्थापना की तिथि और जिन व्यक्तियों की मूर्तियां लगाई गई हैं, उनके नाम शामिल हैं।

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Punjab Haryana High Court on putting Mayor father statue at crossroads
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

रोहतक में सार्वजनिक भूमि पर मेयर के पिता किशन दास की प्रतिमा को लगाने के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि आप पिता की मूर्ति चौराहे पर लगाकर कौन सा सम्मान दे रहे हैं। बेहतर है इसे आप खुद हटा दें और अपने घर पर लगाएं, वहां सही सम्मान मिलेगा। 

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हाईकोर्ट ने रोहतक के डीसी को आदेश दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के 18 जनवरी 2013 के फैसले के बाद रोहतक में स्थापित सभी मूर्तियों का विवरण दें। इसमें मूर्तियों की स्थापना की तिथि और जिन व्यक्तियों की मूर्तियां लगाई गई हैं, उनके नाम शामिल हैं।
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सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि पंडित श्री राम शर्मा की मूर्ति भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की भूमि पर स्थापित की गई है। इस बात की पुष्टि वीसी के जरिए उपस्थित रोहतक नगर निगम के आयुक्त धर्मेंद्र द्वारा भी की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि किशन दास की मूर्ति सार्वजनिक भूमि पर स्थापित की गई है। हालांकि, उन्होंने यह तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का इस मामले में व्यक्तिगत स्वार्थ है, क्योंकि वह और उसका भाई मेयर के किरायेदार रहे हैं और याचिकाकर्ता ने इस तथ्य को कोर्ट से छिपाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस संबंध में एक संक्षिप्त उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए रोहतक निवासी देवेंद्र शर्मा ने हाई कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में आदेश दिया था कि सरकार भूमि पर किसी भी प्रतिमा को स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बाद इसी वर्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री के पिता की प्रतिमा को स्थापित किया गया था जिसके खिलाफ याची ने जनहित याचिका दाखिल की थी। जनहित याचिका पर सरकार ने जानकारी दी थी कि इस प्रतिमा को हटा दिया गया है। 


2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को आदेश दिया था कि वह निगरानी करें और सरकारी भूमि पर ऐसी सभी प्रतिमाओं की पहचान कर उन्हें हटवाएं। इसके बाद जुलाई 2023 में हरियाणा सरकार ने रोहतक के मेयर के पिता की प्रतिमा को लगाने की अनुमति दे दी। याची ने बताया कि यह प्रतिमा पुलिस बीट बाक्स को हटा कर स्थापित की गई है। याची ने इसके खिलाफ मांगपत्र भी दिया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।

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