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शिक्षकों की भर्ती पर पंजाब सरकार को हाईकोर्ट की कड़ी फटकार, पूछा गया- नौकरी क्यों नहीं दे रहे
Thu, 18 Jul 2019 11:11 AM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 18 Jul 2019 11:11 AM IST
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फाइल फोटो
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को लेकर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक ओर बच्चे स्कूलों में शिक्षकों को मोहताज हैं और दूसरी ओर योग्य लोगों को नौकरी नहीं दी जा रही है। हाईकोर्ट ने अब पंजाब सरकार को दस दिन के भीतर शिक्षकों के रिक्त पदों की संख्या का ब्योरा और याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति प्रक्रिया को सही से पूरा किया है या नहीं, इस बारे में जानकारी तलब की है।
विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से 5078 शिक्षकों की भर्ती के आवेदकों ने सिंगल बेंच के आदेश को एडवोकेट परवेश कुमार सैनी के माध्यम से खंडपीठ में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पंजाब सरकार ने 2011 से शिक्षक पात्रता परीक्षा आरंभ की थी और उस वर्ष करीब 5 हजार लोगों ने यह परीक्षा पास की थी। इसके बाद उसी वर्ष 3 हजार पदों के लिए भर्ती हुई और ज्यादातर आवेदकों को नौकरी मिल गई।
पंजाब सरकार ने 2012 में शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन ही नहीं किया और 5078 पदों केलिए फिर से भर्ती निकाल दी। यदि उस वर्ष परीक्षा हुई होती तो याचिकाकर्ता इसके लिए आवेदन हेतु योग्य होते। याची ने बताया कि अभी भी बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं लेकिन सरकार याचिकाकर्ताओं को नौकरी नहीं दे रही है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सिंगल बेंच ने बिना याचिकाकर्ताओं की बात को सही से समझे पंजाब सरकार के पक्ष में आदेश जारी कर दिए।
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खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा है कि याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति प्रक्रिया में सही से भाग लिया और इसे पूरा किया है या नहीं इस बारे में अगली सुनवाई पर जानकारी दी जाए। इसके साथ ही यह भी बताया जाए कि उस भर्ती के कितने पद रिक्त हैं जिन्हें भरा जा सकता है।
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विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से 5078 शिक्षकों की भर्ती के आवेदकों ने सिंगल बेंच के आदेश को एडवोकेट परवेश कुमार सैनी के माध्यम से खंडपीठ में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पंजाब सरकार ने 2011 से शिक्षक पात्रता परीक्षा आरंभ की थी और उस वर्ष करीब 5 हजार लोगों ने यह परीक्षा पास की थी। इसके बाद उसी वर्ष 3 हजार पदों के लिए भर्ती हुई और ज्यादातर आवेदकों को नौकरी मिल गई।
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पंजाब सरकार ने 2012 में शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन ही नहीं किया और 5078 पदों केलिए फिर से भर्ती निकाल दी। यदि उस वर्ष परीक्षा हुई होती तो याचिकाकर्ता इसके लिए आवेदन हेतु योग्य होते। याची ने बताया कि अभी भी बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं लेकिन सरकार याचिकाकर्ताओं को नौकरी नहीं दे रही है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सिंगल बेंच ने बिना याचिकाकर्ताओं की बात को सही से समझे पंजाब सरकार के पक्ष में आदेश जारी कर दिए।
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खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा है कि याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति प्रक्रिया में सही से भाग लिया और इसे पूरा किया है या नहीं इस बारे में अगली सुनवाई पर जानकारी दी जाए। इसके साथ ही यह भी बताया जाए कि उस भर्ती के कितने पद रिक्त हैं जिन्हें भरा जा सकता है।