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Chandigarh: गुलमोहर टाउनशिप घोटाले पर HC ने पंजाब सरकार को दिया नोटिस, पूछा-क्यों न एफआईआर पर लगा दें रोक
Fri, 28 Apr 2023 11:24 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 28 Apr 2023 11:24 AM IST
सार
आरोप के अनुसार याची ने गुलमोहर टाउनशिप के उक्त प्लॉट को कई हिस्सों में बांटने के पत्र को एमडी पीएसआईडीसी को भेज दिया था। पीएसआईडीसी के अधिकारियों ने फाइलों को देखे बिना यहां पर टाउनशिप बसाने की मंजूरी दे दी थी। इस मामले में विजिलेंस ने 5 जनवरी को एफआईआर दर्ज कर जांच आरंभ की थी।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
विस्तार
गुलमोहर टाउनशिप जमीन ट्रांसफर घोटाले में पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने को पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि क्यों न इस एफआईआर व इससे जुड़ी कार्रवाई पर रोक लगा दी जाए। विजिलेंस ने इस मामले में 5 जनवरी 2023 को धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी।
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याचिका दाखिल करते हुए अरोड़ा ने इस घोटाले में अपनी भूमिका से इन्कार करते हुए हाईकोर्ट से एफआईआर रद्द करने की मांग की है। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब सरकार ने साल 1987 में आनंद लैंप्स लिमिटेड कंपनी को सेल डीड के माध्यम से 25 एकड़ जमीन अलॉट की थी, जो बाद में सिगनीफाई इनोवेशन नामक फर्म में तब्दील हो गई। सिगनीफाई इनोवेशन कंपनी ने पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन (पीएसआईडीसी) से एनओसी लेकर इस प्लॉट को गुलमोहर टाउनशिप को बेच दिया था।
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आरोप के अनुसार याची ने गुलमोहर टाउनशिप के उक्त प्लॉट को कई हिस्सों में बांटने के पत्र को एमडी पीएसआईडीसी को भेज दिया था। पीएसआईडीसी के अधिकारियों ने फाइलों को देखे बिना यहां पर टाउनशिप बसाने की मंजूरी दे दी थी। इस मामले में विजिलेंस ने 5 जनवरी को एफआईआर दर्ज कर जांच आरंभ की थी। इस मामले में हाईकोर्ट पहले ही अरोड़ा को अंतरिम जमानत दे चुका है और अब हाईकोर्ट ने एफआईआर व इससे जुड़ी कार्रवाई पर रोक की मांग पर पंजाब सरकार से जवाब तलब कर लिया है।
सुप्रीम कोर्ट से मिल चुकी है राहत
इस मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को छूट दी थी कि वह चाहें तो अपनी मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं। साथ ही चार सप्ताह तक इस मामले में दर्ज एफआईआर में आगे किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।