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नूंह हिंसा: मामन खान की याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस, हाईकोर्ट ने दी कानूनी विकल्पों के इस्तेमाल की छूट
Thu, 14 Sep 2023 11:30 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 14 Sep 2023 11:30 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार एवं अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिया है। इसके साथ ही गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने की छूट भी दी है।
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Nuh Violence Case
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
नूंह हिंसा मामले में घिरे फिरोजपुर झिरका के विधायक मामन खान ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल मामले की जांच उच्च अधिकारियों की एसआईटी से करवाने की मांग की थी। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार एवं अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिया है। इसके साथ ही गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने की छूट भी दी है।
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याचिका दाखिल करते हुए मामन खान ने हाईकोर्ट को बताया था कि उन्हें शक है कि राजनीतिक कारणों से उन्हें नूंह हिंसा मामले में फंसाया जा सकता है। हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी 31 जुलाई को हुई थी। जिस दौरान यह पूरा प्रकरण हुआ, वह क्षेत्र में मौजूद ही नहीं थे। 26 जुलाई से एक अगस्त तक वह बाहर थे। इस मामले में जांच को हाईजैक किया जा चुका है और जांच पहले से तय की गई दिशा की तरफ बढ़ रही है। इस मामले में आगामी चुनाव में राजनीतिक लाभ पाने के लिए कांग्रेस पार्टी व इससे जुड़े लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि इस मामले में दर्ज सभी एफआईआर की जांच एसआईटी को सौंपी जाए, जिसका मुखिया आईजी रैंक से नीचे का न हो। इसके साथ ही एसआईटी को यह आदेश दिया जाए कि वह अपनी जांच को किसी भी राजनीतिक पार्टी के नुमाइंदे से साझा न करे क्योंकि यह बेहद संवेदनशील मामला है। इसके साथ ही यह आदेश दिया जाए कि यह जांच लंबित रहते याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी कार्रवाई न की जाए।
याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि इस मामले में दर्ज सभी एफआईआर की जांच एसआईटी को सौंपी जाए, जिसका मुखिया आईजी रैंक से नीचे का न हो। इसके साथ ही एसआईटी को यह आदेश दिया जाए कि वह अपनी जांच को किसी भी राजनीतिक पार्टी के नुमाइंदे से साझा न करे क्योंकि यह बेहद संवेदनशील मामला है। इसके साथ ही यह आदेश दिया जाए कि यह जांच लंबित रहते याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी कार्रवाई न की जाए।