हरियाणा लोक सेवा आयोग की भर्ती में धांधली: हाईकोर्ट ने याचिका को बताया जनहित का मुद्दा, किया रेफर
हरियाणा लोक सेवा आयोग की भर्ती में धांधली को लेकर दाखिल की गई याचिका को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने व्यापक जनहित का मुद्दा बताया है।
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हरियाणा लोक सेवा आयोग की भर्ती में धांधली को लेकर दाखिल की गई याचिका को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने व्यापक जनहित का मुद्दा बताया है। गुरुवार को हाईकोर्ट ने इस याचिका को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के लिए रेफर कर दिया है।
सबका मंगल हो संस्था ने दायर की थी याचिका
हरियाणा लोक सेवा आयोग के भर्ती घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय से करवाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सबका मंगल हो संस्था ने अपने वकील प्रदीप रापड़िया व उनके सहयोगियों के माध्यम से यह याचिका मंगलवार को दायर की।
याचिका में कहा गया है कि इस मामले की जांच हाई कोर्ट की निगरानी में ईडी द्वारा होनी चाहिए। इतने संगीन मामले की जांच जो कि राज्य सतर्कता ब्यूरो द्वारा की जा रही है वो नाकाफी है, क्योंकि इस घोटाले में भारी लेन-देन का खुलासा हुआ है और अनेकों उच्च अधिकारियों के शामिल होने की बात को नकारा नहीं जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस मामले में आय से अधिक संपत्ति की जांच भी होनी चाहिए और घोटाले में भारी लेन-देन होने के कारण मनी लांड्रिंग भी हुई है।
गौरतलब है कि बहुचर्चित एचपीएससी भर्ती रिश्वत मामले में डिप्टी सेक्रेटरी (एचपीएससी) अनिल नागर समेत अश्वनी और नवीन की गिरफ्तारी हो चुकी है। राज्य सतर्कता ब्यूरो के मुताबिक आरोपियों से साढ़े तीन करोड़ रुपयों से अधिक की वसूली हो चुकी है।
इससे पहले सबका मंगल हो संस्था ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के वकील प्रदीप रापड़िया के माध्यम से प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक (इंटेलिजेंस) को शिकायत भेजते हुए कहा था कि अब तक तीन करोड़ से ज्यादा नगदी और पचास लाख से ज्यादा की जमीन के दस्तावेज आरोपियों से बरामद हो चुके हैं। ऐसे में बरामद की गई नगदी व जायदाद भ्रष्टाचार के माध्यम से अर्जित की गई संपत्ति है, इसलिए प्रवर्तन निदेशालय को भी केस दर्ज करके मामले की तह तक जांच करनी चाहिए। अगर प्रवर्तन निदेशालय ने तुरंत केस दर्ज नहीं किया तो उन्हें पूरे मामले की तह तक जांच करवाने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।
बता दें कि विपक्ष पहले से ही इस मामले की न्यायिक जांच की मांग करता आ रहा है और आगामी हरियाणा विधान सभा सत्र 17 दिसंबर से शुरू हो रहा है जिसमें यह मामला पूरे जोर-शोर से उठने की उम्मीद है।