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झूठे केस में फंसाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज, पर कार्रवाई नहीं

Tue, 25 Oct 2016 07:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़ Updated Tue, 25 Oct 2016 07:36 PM IST
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Punjab-Haryana High Court, haryana police, FIR, Mewat, fraud
डेमो पिक
एनडीपीएस के तहत झूठी एफआईआर दर्ज कर एक व्यक्ति को परेशान करने के आरोपी पांच पुलिसकर्मियों व छह अन्य लोगों के खिलाफ आईजी के आदेश पर इस साल फरवरी में एफआईआर तो दर्ज की गई, लेकिन उनके खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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पुलिस के इस रवैये के खिलाफ अब पीड़ित व्यक्ति ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मंगलवार को हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में पहुंची याचिका पर कल या परसों सुनवाई होने के आसार हैं।
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भरतपुर राजस्थान निवासी कुंदन लाल ने याचिका में कहा है कि भरतपुर के ही दो निवासी असु उर्फ आस मोहम्मद और रफीक ने गांव से दिल्ली जाने के लिए उसकी स्कार्पियो किराए पर ली और बीच रास्ते में उन्हें वाहन से उतारकर होडल के सीआईए कार्यालय में ले जाया गया, जहां पुलिस और असु व रफीक ने अपने साथियों के साथ उसे टार्चर किया।
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2 अगस्त, 2015 को कुंदनलाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 489ए और एनडीपीएस एक्ट की धारा 17, 61, 81 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और हाईकोर्ट के निर्देश पर याचिकाकर्ता ने रेवाड़ी के आईजी के समक्ष रिप्रेजेंटेशन दी।

आईजी रेवाड़ी की ओर से कराई गई जांच में याचिकाकर्ता निर्दोष पाया गया और 2 फरवरी, 2016 को असु उर्फ आस मोहम्मद, रफीक, इश्हाक, असू पुत्र मजीद व रफीक पुत्र हुसैन के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि उस दिन से वह बार-बार पुन्हाना पुलिस स्टेशन और मेवात के एसपी के पास जाता रहा और उन्हें सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने का आग्रह करता रहता रहा, लेकिन चूंकि आरोपी इलाके के प्रभावशाली व्यक्ति हैं।


याचिका में आगे कहा गया है कि मेवात पुलिस इस मामले में ऐसी कोशिशों में जुटी है कि केस को किस तरह डिस्टर्ब किया जा सके। याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि आईजी के निर्देश पर दर्ज एफआईआर पर जल्द कार्रवाई करते हुए पुलिस को आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी के आदेश दिए जाएं।
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