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चंडीगढ़: जजों की भारी कमी से जूझ रहा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, लोगों को मिल रही तारीख पर तारीख
Sun, 24 Oct 2021 01:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा
विवेक शर्मा, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 24 Oct 2021 01:59 AM IST
सार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पद 85, 40 पद अभी तक रिक्त। जजों की कमी की सूची में दूसरे पायदान पर, पहला इलाहाबाद हाईकोर्ट।
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जजों के 85 पद मंजूर होने बावजूद केवल 45 जज कार्यरत होने के चलते जजों की भारी कमी से जूझ रहा है। हाईकोर्ट को इस समय 40 जजों का इंतजार करना पड़ रहा है, जिसके चलते लोगों को तारीख पर तारीख मिल रही है। जजों की कमी के कारण हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या करीब साढ़े 4 लाख तक पहुंच गई है। जजों की कमी की सूची में पहले स्थान पर इलाहाबाद हाईकोर्ट है, जबकि दूसरा स्थान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की ओर से एसपी गुप्ता मामले में दिए गए फैसले के बाद जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया बेहद पेचीदा और धीमी हो गई है। पहले केंद्र सरकार भारत के मुख्य न्यायाधीश से विमर्श कर वकीलों को जज के तौर पर एलिवेट कर देती थी। अब विभिन्न हाईकोर्ट का कोलाजियम (तीन सबसे वरिष्ठ जज) वकीलों के नाम सुप्रीम कोर्ट को भेजता है। सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम इन नामों में से उपयुक्त को केंद्र सरकार को भेजते हैं और उसके बाद जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होती है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट भी देश के अन्य हाईकोर्ट की तरह इसी धीमी और लंबी प्रक्रिया से पीड़ित है। एक अक्तूबर 2021 तक प्राप्त जानकारी के अनुसार देश में जजों के 1098 स्वीकृत पद हैं और इनमें से 471 पद रिक्त पड़े हैं, जो कुल पदों का करीब 43 फीसदी हैं। देश में सबसे ज्यादा रिक्त पदों के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के बाद दूसरे नंबर पर आता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जहां 160 में से 69 पद रिक्त हैं, वहीं पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में 85 में से 40 पदों पर जजों का इंतजार है।
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नियुक्ति के लिए हो समयबद्ध प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए समयबद्ध प्रक्रिया तय करनी चाहिए। 6 माह के भीतर हाईकोर्ट कोलाजियम से केंद्र सरकार तक वकीलों के नामों पर निर्णय लेना अनिवार्य बनाना चाहिए। इसके साथ ही पदों को भरने के लिए कोलाजियम की बैठक को लेकर कोई नियम नहीं है, जबकि इसे हर माह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जिन वकीलों का नाम बतौर जज नियुक्ति के लिए भेजा जाता है, उनकी झूठी शिकायतें भेजने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो उनके नाम पर स्वीकृति की प्रक्रिया में देरी का बड़ा कारण बनता है।
-लेख राज शर्मा, पूर्व चेयरमैन, पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल
कोलाजियम की देरी का नतीजा है, जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में देरी
केंद्र सरकार तेजी से जजों के पदों को भरने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन कोलाजियम नामों को मंजूर करके नहीं भेज रहा है। कोलाजियम को चाहिए कि जितने रिक्त पद हैं, उन्हें भरने के लिए नामों की सूची केंद्र को सौंपें, ताकि जल्द इन पदों को भरा जा सके। पहले हाईकोर्ट के और फिर सुप्रीम कोर्ट के कोलाजियम में लटकना धीमी प्रक्रिया का कारण है। हाईकोर्ट में योग्य वकीलों की कमी नहीं है, जिन्हें जज बनाया जा सके। फिर भी जितने पद रिक्त हैं, उतने नाम कोलाजियम भेजता ही नहीं है। जब भी कोई जज रिटायर होने वाला हो, उससे 6 माह पूर्व उनके स्थान पर नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट कोलाजियम को वकील का नाम सुप्रीम कोर्ट भेज देना चाहिए, ताकि पद ज्यादा समय तक रिक्त न रहे।
सत्यपाल जैन, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया