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दिव्यांग आईएएस के तबादले को चुनौती पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, सामान्य प्रक्रिया है स्थानांतरण

Thu, 11 Feb 2021 10:18 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 11 Feb 2021 10:18 AM IST
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Punjab-Haryana High Court dismissed the petition against transfer of handicapped IAS officer
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

हरियाणा के दिव्यांग आईएएस अधिकारी रवि प्रकाश गुप्ता को डीसी पद से दो साल से पहले हटाने के खिलाफ याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि गुप्ता को पद से हटाने के पीछे सरकार द्वारा भेदभावपूर्ण व्यवहार या सेवा के नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है।

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कोर्ट ने कहा कि स्थानांतरण एक सामान्य प्रक्रिया है। सेवा के दौरान किसी भी सरकारी कर्मचारी को एक पद पर बने रहने का निहित अधिकार नहीं है और न ही एक कर्मचारी उसके संबंध में शर्तों को निर्धारित कर सकता है। पोस्टिंग की जगह तय करना नियोक्ता का अधिकार है, जो जरूरत को ध्यान में रखते हुए जनहित के अनुसार प्रयोग करता है। 
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हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही कैट (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण) चंडीगढ़ बेंच के आदेश को सही ठहराया। इससे पहले हाईकोर्ट ने इस मामले में गुप्ता की याचिका पर हरियाणा की पूर्व मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा को अवमानना नोटिस जारी किया था। 
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हाईकोर्ट ने कहा था कि शीर्ष अदालत के आदेश के तहत गुप्ता को फील्ड ड्यूटी डीसी फतेहाबाद लगाया गया था। अरोड़ा ने हाईकोर्ट में जवाब दायर कर कहा था कि एक आईएएस अधिकारी को केंद्र में डेपुटेशन पर जाने के लिए तीन साल का फील्ड का अनुभव जरूरी है। गुप्ता ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार ने उसे तीन साल तक फील्ड में काम नहीं करने दिया। 


अरोड़ा ने हाईकोर्ट को बताया कि गुप्ता पहले छत्तीसगढ़ में कार्यरत थे, जहां उन्होंने 7 सितंबर 2012 से लेकर 4 अक्तूबर 2014 तक फील्ड में काम किया, हरियाणा में आने के बाद उन्होंने डीसी फतेहाबाद व कैथल में काम किया। कुल मिलाकर उन्होंने 36 महीने 11 दिन फील्ड में काम किया। ऐसे में उनके आरोप झूठे हैं कि नियमों के अनुसार उनको तीन साल फील्ड में काम नहीं दिया गया। केशनी आनंद अरोड़ा के इस जवाब पर हाईकोर्ट ने उनको अवमानना के आरोप से मुक्त कर दिया।

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