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मां से बेहतर परवरिश नहीं दे सकते रिश्तेदार, तो बच्चों की कस्टडी मां को सौंपो: हाईकोर्ट
Thu, 03 Jan 2019 11:29 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 03 Jan 2019 11:29 AM IST
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Court case
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बच्चों के लिए मां सबसे बेहतर अभिभावक होती है, उससे बेहतर परवरिश कोई रिश्तेदार नहीं दे सकता है। हाईकोर्ट का बच्चों के फूफा को निर्देश जारी। पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए दो बच्चों की कस्टडी बुआ-फूफा से लेकर बच्चों को वापस मां को सौंपने के आदेश दिए हैं।
कपूरथला निवासी बच्चों की मां ने याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि उसका विवाह 2007 में हुआ था। उसके पति इटली में बसे हुए थे और न तो वह उसे और न ही बच्चों के लिए गुजारा भत्ता देते थे । इसी बीच याची बच्चों के साथ अपने भाई के पास मलयेशिया चली गई। याची का पति भारत लौटा तो उसने पत्नी के खिलाफ सोना चोरी करने की एफआईआर दर्ज करवा दी।
जब महिला भारत लौटी तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस अवधि में मां के जेल में होने के चलते बच्चों की कस्टडी उसके पिता को सौंप दी गई। पिता बच्चों को अपने बहन-बहनोई के हवाले कर इटली चला गया। मां ने जमानत पर बाहर आने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बच्चों की कस्टडी सौंपने की अपील की।
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कपूरथला निवासी बच्चों की मां ने याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि उसका विवाह 2007 में हुआ था। उसके पति इटली में बसे हुए थे और न तो वह उसे और न ही बच्चों के लिए गुजारा भत्ता देते थे । इसी बीच याची बच्चों के साथ अपने भाई के पास मलयेशिया चली गई। याची का पति भारत लौटा तो उसने पत्नी के खिलाफ सोना चोरी करने की एफआईआर दर्ज करवा दी।
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जब महिला भारत लौटी तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस अवधि में मां के जेल में होने के चलते बच्चों की कस्टडी उसके पिता को सौंप दी गई। पिता बच्चों को अपने बहन-बहनोई के हवाले कर इटली चला गया। मां ने जमानत पर बाहर आने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बच्चों की कस्टडी सौंपने की अपील की।
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फूफा ने जवाब में दी ये दलील
याचिका पर सुनवाई के दौरान याची ने बताया कि वह स्कूल में बच्चों से मिली थी और बच्चें वहां बेहतर महसूस नहीं कर रहे हैं। साथ ही याची ने कहा कि उन्हें बेहतर शिक्षा व सुविधाएं भी मुहैया नहीं करवाई जा रही हैं। इस पर बच्चों के फूफा और बुआ ने जवाब दाखिल करते हुए कहा कि बच्चों को शिक्षा व सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं जिसका खर्च बच्चों के पिता वहन कर रहे हैं।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि बुआ और फूफा मां की परवरिश का स्थान नहीं ले सकते हैं। मां की पुलिस हिरासत के कारण अस्थाई कस्टडी पिता को दी गई थी। अब जब मां जेल से बाहर है तो उससे बेहतर परवरिश बच्चों को कोई और रिश्तेदार नहीं दे सकता।
हालांकि कोर्ट ने कस्टडी मां को सौंपते हुए यह आदेश दिए कि यह आदेश केवल पिता के विदेश रहते ही है। एसएसपी कपूरथला को एक सप्ताह के भीतर बच्चों की कस्टडी मां को सौंपने के आदेश का पालन करने को कहा गया है।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि बुआ और फूफा मां की परवरिश का स्थान नहीं ले सकते हैं। मां की पुलिस हिरासत के कारण अस्थाई कस्टडी पिता को दी गई थी। अब जब मां जेल से बाहर है तो उससे बेहतर परवरिश बच्चों को कोई और रिश्तेदार नहीं दे सकता।
हालांकि कोर्ट ने कस्टडी मां को सौंपते हुए यह आदेश दिए कि यह आदेश केवल पिता के विदेश रहते ही है। एसएसपी कपूरथला को एक सप्ताह के भीतर बच्चों की कस्टडी मां को सौंपने के आदेश का पालन करने को कहा गया है।