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किसी और ने भरा है, यह दलील देकर चेक की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता जारीकर्ता: हाईकोर्ट
Fri, 23 Aug 2019 09:45 AM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 23 Aug 2019 09:45 AM IST
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अदालत
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने नेगोशिएबल इंस्टूमेंट एक्ट को लेकर पैदा हुए विवाद का निपटारा करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि चेक पर धारक के हस्ताक्षर ही उसे वैध बनाने के लिए काफी हैं। याची ने कहा था कि चेक उसने नहीं भरा पर हस्ताक्षर उसके हैं ऐसे में इस भुगतान के लिए उसकी मंजूरी नहीं थी।
इस दलील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि चेक कोई भी भरे यदि हस्ताक्षर मौजूद हैं तो इसे मंजूरी ही माना जाएगा। याचिका में फरीदकोट निवासी सुखजिंदर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि एक चेक जिस पर उसके हस्ताक्षर थे, उसे क्लीयरेंस के लिए लगाया गया था।
चेक बाउंस होने के चलते बूटा सिंह ने उसके खिलाफ शिकायत दी और ट्रायल चल रहा था। ट्रायल कोर्ट में उसने मांग की थी कि चेक जिस हैंड राइटिंग में भरा गया है और याची की हेंड राइटिंग का मिलान कराया जाए। ट्रायल कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया था।
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इस दलील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि चेक कोई भी भरे यदि हस्ताक्षर मौजूद हैं तो इसे मंजूरी ही माना जाएगा। याचिका में फरीदकोट निवासी सुखजिंदर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि एक चेक जिस पर उसके हस्ताक्षर थे, उसे क्लीयरेंस के लिए लगाया गया था।
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चेक बाउंस होने के चलते बूटा सिंह ने उसके खिलाफ शिकायत दी और ट्रायल चल रहा था। ट्रायल कोर्ट में उसने मांग की थी कि चेक जिस हैंड राइटिंग में भरा गया है और याची की हेंड राइटिंग का मिलान कराया जाए। ट्रायल कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया था।
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इसके बाद एडिशनल सेशन जज के पास रिवीजन दाखिल की गई, जिसे खारिज कर दिया गया। अब याची ने हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि चेक पर जारीकर्ता के हस्ताक्षर ही उसकी मंजूरी का प्रमाण हैं। चेक उसने नहीं भरा यह दलील देकर जारीकर्ता अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है।
यदि ऐसा प्रावधान कर दिया जाए कि चेक जारीकर्ता द्वारा भरा जाना अनिवार्य है तो लोग इसे हथियार बना लेंगे। पहले से किसी और से चेक भरवा कर खुद हस्ताक्षर कर देंगे और बाद में दलील देंगे कि चेक उन्होंने नहीं भरा और ऐसे में उनकी कोई जिम्मदारी नहीं है।
ऐसे में हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि चेक जारीकर्ता द्वारा खुद न भरा जाना उसकी नामंजूरी नहीं माना जा सकता और उसे उसकी जिम्मेदारी को निभाना होगा।
यदि ऐसा प्रावधान कर दिया जाए कि चेक जारीकर्ता द्वारा भरा जाना अनिवार्य है तो लोग इसे हथियार बना लेंगे। पहले से किसी और से चेक भरवा कर खुद हस्ताक्षर कर देंगे और बाद में दलील देंगे कि चेक उन्होंने नहीं भरा और ऐसे में उनकी कोई जिम्मदारी नहीं है।
ऐसे में हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि चेक जारीकर्ता द्वारा खुद न भरा जाना उसकी नामंजूरी नहीं माना जा सकता और उसे उसकी जिम्मेदारी को निभाना होगा।