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दाखिले के लिए एनआरआई कोटे में करीबी रिश्तेदार को लाभ नहीं दिया जा सकता, खारिज की गई याचिका
Thu, 27 Jun 2019 09:44 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 27 Jun 2019 09:44 AM IST
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फाइल फोटो
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एमबीबीएस/बीडीएस कोर्स में दाखिले के लिए एनआरआई कोटे में करीबी रिश्तेदारों को लाभ न देने के पंजाब सरकार के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।
हाईकोर्ट ने यह आदेश एक याचिका को खारिज करते हुए दिए। मोहाली निवासी अश्मिता कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने एनआरआई कोटे को लेकर एक लंबित याचिका पर अंतरिम आदेश जारी किए थे।
इस आदेश में कहा गया था कि एनआरआई और उसके बच्चों के अतिरिक्त उन आवेदकों को भी दाखिला दिया जा सकता है, जिन्हें एनआरआई स्पॉन्सर करे या बेहद नजदीकी रिश्तेदार (फर्स्ट डिग्री रिलेशन) हों। ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि आवेदक की देखभाल का जिम्मा एनआरआई पर हो।
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हाईकोर्ट ने यह आदेश एक याचिका को खारिज करते हुए दिए। मोहाली निवासी अश्मिता कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने एनआरआई कोटे को लेकर एक लंबित याचिका पर अंतरिम आदेश जारी किए थे।
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इस आदेश में कहा गया था कि एनआरआई और उसके बच्चों के अतिरिक्त उन आवेदकों को भी दाखिला दिया जा सकता है, जिन्हें एनआरआई स्पॉन्सर करे या बेहद नजदीकी रिश्तेदार (फर्स्ट डिग्री रिलेशन) हों। ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि आवेदक की देखभाल का जिम्मा एनआरआई पर हो।
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याची ने कहा कि पंजाब सरकार ने फर्स्ट डिग्री रिलेशन को इस कोटे से बाहर कर दिया है, जो सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने पंजाब सरकार के इस प्रावधान को रद्द करके याची को एनआरआई कोटे के तहत दाखिला दिए जाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन याचिका के अंतरिम आदेश के तहत राहत मांग रही है, लेकिन यह सरकार का पॉलिसी मैटर है। सरकार चाहे तो इस कोटे में छूट दे सकती है और नियम निर्धारित करने का अधिकार भी उसी के पास है। न्यायालय द्वारा पॉलिसी मैटर में दखल दिया जाना सही नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन याचिका के अंतरिम आदेश के तहत राहत मांग रही है, लेकिन यह सरकार का पॉलिसी मैटर है। सरकार चाहे तो इस कोटे में छूट दे सकती है और नियम निर्धारित करने का अधिकार भी उसी के पास है। न्यायालय द्वारा पॉलिसी मैटर में दखल दिया जाना सही नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।