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महिला सरपंच बोली- फरवरी महीने में 30 दिन होते हैं और चली गई नौकरी, जानिए मामला
Sat, 27 Apr 2019 12:23 PM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 27 Apr 2019 12:23 PM IST
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फाइल फोटो
महिला सरपंच ने एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि फरवरी के महीने में तीस दिन होते हैं और उसकी नौकरी चली गई। मामला पंजाब का है। फिरोजपुर झिरका के गांव जमालगढ़ की सरपंच संजीदा को फरवरी में 30 दिन बताने पर अपनी सरपंची खोनी पड़ गई। इलेक्शन ट्रिब्यूनल द्वारा सरपंच के पद के लिए उसे अयोग्य घोषित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दिया।
याचिका दाखिल करते हुए संजीदा ने हाईकोर्ट को बताया कि सरपंच पद के लिए 10 जनवरी 2016 को चुनाव हुआ था। उसमें वह 167 मतों से विजयी रही थी। उसके निर्वाचन को चुनौती देते हुए फरजीदा ने इलेक्शन ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की थी। ट्रिब्यूनल ने संजीदा के आठवीं के प्रमाण पत्र को फर्जी मानते हुए उसके चुनाव को खारिज कर दिया था।
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याचिका दाखिल करते हुए संजीदा ने हाईकोर्ट को बताया कि सरपंच पद के लिए 10 जनवरी 2016 को चुनाव हुआ था। उसमें वह 167 मतों से विजयी रही थी। उसके निर्वाचन को चुनौती देते हुए फरजीदा ने इलेक्शन ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की थी। ट्रिब्यूनल ने संजीदा के आठवीं के प्रमाण पत्र को फर्जी मानते हुए उसके चुनाव को खारिज कर दिया था।
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हाईकोर्ट ने कई सवाल पूछे, जवाब नहीं दे पाई याची
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रमाणपत्र में खामियां पाईं, लेकिन फिर भी खुद को संतुष्ट करने के लिए याचिकाकर्ता से सामान्य प्रश्न पूछे। हाईकोर्ट द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में याची ने फरवरी को 30 दिन का बताया। हाईकोर्ट के आदेश पर वह न तो अंग्रेजी में गिनती सुना पाई और न पहाड़े। साल के सातवें और नौवें महीने का नाम भी नहीं बता पाई।
हाईकोर्ट ने कहा कि जो प्रश्न पूछे गए हैं वे बहुत सामान्य थे। यदि याची आठवीं पढ़ी होती तो इनके जवाब जरूर दे देती। ऐसे में याची की योग्यता पर प्रश्न उठता है और प्रमाण पत्र पहले ही शक के घेरे में है। ऐसे में ट्रिब्यूनल ने सही नतीजा निकाला है, जिसमें हाईकोर्ट के दखल की जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने इसी टिप्पणी के साथ संजीदा की याचिका को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि जो प्रश्न पूछे गए हैं वे बहुत सामान्य थे। यदि याची आठवीं पढ़ी होती तो इनके जवाब जरूर दे देती। ऐसे में याची की योग्यता पर प्रश्न उठता है और प्रमाण पत्र पहले ही शक के घेरे में है। ऐसे में ट्रिब्यूनल ने सही नतीजा निकाला है, जिसमें हाईकोर्ट के दखल की जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने इसी टिप्पणी के साथ संजीदा की याचिका को खारिज कर दिया।