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कांच के घरों में रहते हैं जज, उनके लिए हर आरोप का जवाब देना आसान नहीं होता: हाईकोर्ट

Thu, 09 May 2019 01:30 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 09 May 2019 01:30 PM IST
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Punjab Haryana High Court Chief Justice Statement on Judges
फाइल फोटो
कांच के घरों में रहते हैं जज, उनके लिए हर आरोप का जवाब देना आसान नहीं होता। यह टिप्पणी पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए की। चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी ने 2011 में हुए एक दुष्कर्म मामले में आरोपियों को बरी करने के लिए जजों और सीनियर वकीलों द्वारा दबाव बनाने के आरोप से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। पीड़ित महिला ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को खारिज करने की अपील की है।
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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के वर्तमान जज और कुछ सीनियर वकीलों ने ट्रायल कोर्ट पर दबाव डाला था कि आरोपियों को बरी कर दिया जाए क्योंकि आरोपी हाईकोर्ट के जज के रिश्तेदार हैं। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया। अब जब बरी करने के आदेश के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट में लंबित है तो जज उसकी याचिका को गंभीरता से नहीं ले रहे। याची ने कहा कि उसका केस चीफ जस्टिस अपनी कोर्ट में लाकर उस पर खुद सुनवाई करें।
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हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को समझाया कि जनहित याचिका के माध्यम से किसी को बरी किए जाने के आदेश को नहीं खारिज किया जा सकता है और न ही दूसरी खंडपीठ के आदेश को खारिज किया जा सकता है। साथ ही चीफ जस्टिस ने कहा कि इंसान होने के नाते हमें आपसे सहानुभूति है, लेकिन जज होने के नाते हम अपने कानूनी दायरे से बाहर जाकर काम नहीं कर सकते। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि चाहे जज धमकाए या वकील आपके पास थाने जाकर एफआईआर दर्ज करवाने का विकल्प मौजूद है।
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साथ ही कोर्ट ने वर्तमान जज पर आरोप लगाने पर याची को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसा करना सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना का मामला बनता है। याची बार-बार जिद करती रही कि उसका मामला चीफ जस्टिस की बेंच द्वारा ही सुना जाए जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई बुधवार सुबह के लिए रखते हुए उसे आवश्यक मदद का आश्वासन दिया।
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