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पंजाब-हरियाणा के विद्यार्थियों में पढ़ने की रुचि कम
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Sat, 03 Sep 2016 08:09 PM IST
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पीयरसन वायस ऑफ टीचर सर्वे के अनुसार पंजाब में 48 और हरियाणा में 52 फीसदी विद्यार्थी पढ़ाई को लेकर विशेष गंभीर नहीं हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक समुदाय ने सामूहिक रूप से भारतीय विद्यार्थियों की वर्तमान रुचि पर अपनी राय दी है।
सर्वे के चौथे संस्करण के माध्यम से विद्यार्थियों की शिक्षा के प्रति रुचि को बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कारकों को भी पहचाना है। देश भर में जुलाई 2016 से अगस्त 2016 के बीच करवाए गए सर्वे में शिक्षक की महत्वपूर्ण अंतदृष्टियां शामिल हैं, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और भारत में शिक्षार्थी परिणामों में सुधार करने के भारत सरकार के बड़े विजन में योगदान दे सकती हैं।
सर्वेक्षण में पंजाब के 29 और हरियाणा के 20 शहरों को शामिल किया गया था। राष्ट्रीय निष्कर्ष के अनुसार शिक्षकों का मानना है कि केवल 55 फीसदी विद्यार्थी ही सक्रिय रूप से शैक्षणिक प्रक्रिया में रुचि रखते हैं। शिक्षकों का मानना है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी (51 फीसदी) निजी स्कूलों (67 फीसदी) की तुलना में शिक्षण के साथ बहुत कम जुड़े हुए हैं।
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शिक्षक जहां यह मानते हैं कि पिछले पांच वर्षों से शिक्षण गतिविधियों में प्रतिभागिता बढ़ी है, वहीं उनका यह भी कहना है कि विद्यार्थियों के मूल्यों व नैतिकता और अनुशासन में उल्लेखनीय गिरावट आई है। शिक्षक महसूस करते हैं कि विद्यार्थियों की ओर से व्यक्तिगत गजट के अत्यधिक प्रयोग और माता-पिता के समर्थन में कमी विद्यार्थियों की रुचि कम होने के मुख्य कारण हैं।
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सर्वे के चौथे संस्करण के माध्यम से विद्यार्थियों की शिक्षा के प्रति रुचि को बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कारकों को भी पहचाना है। देश भर में जुलाई 2016 से अगस्त 2016 के बीच करवाए गए सर्वे में शिक्षक की महत्वपूर्ण अंतदृष्टियां शामिल हैं, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और भारत में शिक्षार्थी परिणामों में सुधार करने के भारत सरकार के बड़े विजन में योगदान दे सकती हैं।
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सर्वेक्षण में पंजाब के 29 और हरियाणा के 20 शहरों को शामिल किया गया था। राष्ट्रीय निष्कर्ष के अनुसार शिक्षकों का मानना है कि केवल 55 फीसदी विद्यार्थी ही सक्रिय रूप से शैक्षणिक प्रक्रिया में रुचि रखते हैं। शिक्षकों का मानना है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी (51 फीसदी) निजी स्कूलों (67 फीसदी) की तुलना में शिक्षण के साथ बहुत कम जुड़े हुए हैं।
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शिक्षक जहां यह मानते हैं कि पिछले पांच वर्षों से शिक्षण गतिविधियों में प्रतिभागिता बढ़ी है, वहीं उनका यह भी कहना है कि विद्यार्थियों के मूल्यों व नैतिकता और अनुशासन में उल्लेखनीय गिरावट आई है। शिक्षक महसूस करते हैं कि विद्यार्थियों की ओर से व्यक्तिगत गजट के अत्यधिक प्रयोग और माता-पिता के समर्थन में कमी विद्यार्थियों की रुचि कम होने के मुख्य कारण हैं।