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Punjab News: घर-घर राशन योजना में होगा संशोधन, पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल किया जवाब

Mon, 17 Oct 2022 08:49 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 17 Oct 2022 08:49 PM IST
सार

खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इस योजना के तहत तीसरे पक्ष को लाभ देने पर रोक लगा दी थी। अब योजना में संशोधन की पंजाब सरकार द्वारा दी गई जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। 

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Punjab govt said in High Court there will be amendment in door to door ration scheme
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने डिपो धारकों के बजाय अन्य एजेंसियों के माध्यम से राशन घर-घर पहुंचाने की पंजाब सरकार की योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब सरकार ने जवाब दाखिल किया और बताया कि योजना में सरकार संशोधन करने जा रही है। पंजाब सरकार द्वारा दी गई इस जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। साथ ही याची को छूट दी कि अगर संशोधन के बाद याची को योजना से आपत्ति हो तो वह फिर से हाईकोर्ट की शरण ले सकते हैं।

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बठिंडा की एनएफएसए डिपो होल्डर वेलफेयर एसोसिएशन ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि एसोसिएशन के सदस्य पंजाब में उचित मूल्य की दुकानें चलाते हैं। पंजाब सरकार ने योजना बनाई है कि राशन होम डिलीवरी के माध्यम से सीधा लाभार्थियों के घर तक पहुंचाएंगे। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनके पास डिपो के लिए उचित लाइसेंस मौजूद हैं और अभी तक वह लाभार्थियों तक राशन पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। 
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अब सरकार ने आटा निजी कंपनी के माध्यम से सीधा लाभार्थियों के घर तक पहुंचाने की योजना बनाई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सरकार का यह फैसला संविधान में मौजूद प्रावधानों के विपरीत है। भारत सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली तैयार की है और अनाज को इसी प्रणाली के माध्यम से ही वितरित किया जाना चाहिए लेकिन पंजाब सरकार ऐसा नहीं कर रही है। 

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पंजाब सरकार ने निजी कंपनियों को बीच में लाकर उचित मूल्य की दुकानों को बायपास किया है। याचिका में पंजाब सरकार की इस योजना को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि पंजाब में सार्वजनिक वितरण प्रणाली से छेड़छाड़ न करने का पंजाब सरकार को आदेश दिया जाए। सिंगल बेंच ने योजना पर रोक लगाते हुए पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया था। 

रोक के खिलाफ पंजाब सरकार खंडपीठ के समक्ष पहुंची थी। खंडपीठ ने सिंगल बेंच को आदेश पर फिर से विचार करने को कहा था। सिंगल बेंच ने अब रोक को हटाते हुए याचिका खंडपीठ को रेफर कर दी थी। खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इस योजना के तहत तीसरे पक्ष को लाभ देने पर रोक लगा दी थी। अब योजना में संशोधन की पंजाब सरकार द्वारा दी गई जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। 

17000 उचित मूल्य की दुकानों को किया जा रहा बायपास
याचिका में बताया गया कि पंजाब में 17000 उचित मूल्य की दुकानों का नेटवर्क मौजूद है। इस नेटवर्क के इस्तेमाल के स्थान पर आटा लोगों के घरों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। याची ने बताया कि केंद्र सरकार ने तीन नवंबर 2014 को सर्कुलर जारी कर राज्यों को कहा था कि खाद्य सामग्री का वितरण टार्गेट पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम के नेटवर्क के माध्यम से किया जाएगा। इसके बावजूद पंजाब सरकार नेटवर्क से बाहर जाकर काम कर रही है।

दिल्ली में इस योजना का टेंडर हो चुका है खारिज
पंजाब में घर-घर राशन की स्कीम से पहले आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे दिल्ली में लागू करने की योजना बनाई थी। दिल्ली सरकार ने इसके लिए टेंडर भी जारी किया था। टेंडर की प्रक्रिया को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने तब इस टेंडर प्रक्रिया को खारिज कर दिया था। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट की जजमेंट के आधार पर पंजाब सरकार द्वारा जारी टेंडर प्रक्रिया को खारिज करने की हाईकोर्ट से अपील की गई है।

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