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चंडीगढ़ से कई विभाग मोहाली शिफ्ट होने जा रहे हैं, जानिए क्यों और कौन से?
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 13 Jul 2017 02:26 PM IST
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पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के लोगों के लिए बड़ी खबर। चंडीगढ़ से कई विभाग मोहाली शिफ्ट होने जा रहे हैं, इसके चलते परेशानी उठानी पड़ सकती है। दरअसल, पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार को सत्ता संभालते ही खजाना खाली होने के कारण जिस हालात से गुजरना पड़ा, उसके बाद वह सभी मामलों में हाथ खींचकर पैसा खर्च कर रही है। इतना ही नहीं, सरकार का प्रयास अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाना भी है।
इसी कड़ी में सरकार ने फैसला किया है कि राजधानी चंडीगढ़ में किराए की इमारतों में पंजाब सरकार के जो कार्यालय चल रहे हैं, उन्हें मोहाली में तैयार विभिन्न विभागों के मुख्यालयों की इमारतों में शिफ्ट कर दिया जाए। इससे जहां, चंडीगढ़ में दिया जा रहा दफ्तरों का किराया बचेगा, वहीं सरकार का दावा है कि आम लोगों को भी किसी विभाग के अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और लोगों को किसी भी विभाग से हर तरह की जानकारी एक ही छत के नीचे मिल जाएगी।
इस संबंध में राज्य के पर्सोनल विभाग द्वारा अब तक यह जानकारी जुटा ली गई है कि चंडीगढ़ में राज्य सरकार के 30 ऐसे दफ्तर हैं, जो लंबे समय से किराए के भवनों में चल रहे हैं और इसके एवज में इमारत मालिकों को किराए के रूप में भारी-भरकम रकम सरकारी खजाने से दी जा रही है। वित्त विभाग इन दिनों उक्त 30 दफ्तरों द्वारा किराए के रूप में दिए जा रहे पैसों का हिसाब भी लगा रहा है। कुछ दफ्तर चंडीगढ़ में मुख्य सचिवालय और मिनी सचिवालय में भी शिफ्ट किए जा सकते हैं।
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इसी कड़ी में सरकार ने फैसला किया है कि राजधानी चंडीगढ़ में किराए की इमारतों में पंजाब सरकार के जो कार्यालय चल रहे हैं, उन्हें मोहाली में तैयार विभिन्न विभागों के मुख्यालयों की इमारतों में शिफ्ट कर दिया जाए। इससे जहां, चंडीगढ़ में दिया जा रहा दफ्तरों का किराया बचेगा, वहीं सरकार का दावा है कि आम लोगों को भी किसी विभाग के अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और लोगों को किसी भी विभाग से हर तरह की जानकारी एक ही छत के नीचे मिल जाएगी।
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इस संबंध में राज्य के पर्सोनल विभाग द्वारा अब तक यह जानकारी जुटा ली गई है कि चंडीगढ़ में राज्य सरकार के 30 ऐसे दफ्तर हैं, जो लंबे समय से किराए के भवनों में चल रहे हैं और इसके एवज में इमारत मालिकों को किराए के रूप में भारी-भरकम रकम सरकारी खजाने से दी जा रही है। वित्त विभाग इन दिनों उक्त 30 दफ्तरों द्वारा किराए के रूप में दिए जा रहे पैसों का हिसाब भी लगा रहा है। कुछ दफ्तर चंडीगढ़ में मुख्य सचिवालय और मिनी सचिवालय में भी शिफ्ट किए जा सकते हैं।
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विभिन्न विभागों के सात अफसरों की बनाई कमेटी
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पर्सोनल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने अपने फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए वित्त, पीडब्ल्यूडी, लोकल बाडी, पर्सोनल व अन्य विभागों के सात अधिकारियों की एक कमेटी गठित की है, जो यह पता लगाएगी कि शिफ्ट किए जाने वाले दफ्तर के लिए मोहाली स्थित मुख्यालय के भवन में कितनी खाली जगह उपलब्ध है? क्या मुख्यालय में शिफ्ट किए जाने वाले दफ्तर के लिए अतिरिक्त स्थान की व्यवस्था करनी होगी?
अब तक इस कमेटी द्वारा मोहाली स्थित विभिन्न विभागों के मुख्यालयों से उपलब्ध स्थान के बाबत जानकारी तलब कर ली गई है। यह जानकारी मिलने के बाद कमेटी किसी अंतिम निर्णय तक पहुंचेगी। विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार ने यह तय किया है कि इस साल के भीतर ही चंडीगढ़ से उक्त 30 दफ्तरों को मोहाली शिफ्ट कर दिया जाए। सरकार की तरफ से इसके लिए यही दलील दी जा रही है कि आम लोगों को संबंधित विभाग में अपने काम करवाने के लिए चंडीगढ़ के विभिन्न सेक्टरों में फैले दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे बल्कि एक ही छत्त के विभाग से जुड़े सभी काम हो सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने इस मामले पर सभी विभागों को किराए की इमारतें जल्द से जल्द खाली करने के लिए निर्देश देते हुए साफ कर दिया था कि सरकार अब और आगे किराया नहीं देगी। किराए की इमारतों को लेकर चले रहे अदालती मामलों पर भी पैसा खर्च करने के हक में नहीं है।
अब तक इस कमेटी द्वारा मोहाली स्थित विभिन्न विभागों के मुख्यालयों से उपलब्ध स्थान के बाबत जानकारी तलब कर ली गई है। यह जानकारी मिलने के बाद कमेटी किसी अंतिम निर्णय तक पहुंचेगी। विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार ने यह तय किया है कि इस साल के भीतर ही चंडीगढ़ से उक्त 30 दफ्तरों को मोहाली शिफ्ट कर दिया जाए। सरकार की तरफ से इसके लिए यही दलील दी जा रही है कि आम लोगों को संबंधित विभाग में अपने काम करवाने के लिए चंडीगढ़ के विभिन्न सेक्टरों में फैले दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे बल्कि एक ही छत्त के विभाग से जुड़े सभी काम हो सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने इस मामले पर सभी विभागों को किराए की इमारतें जल्द से जल्द खाली करने के लिए निर्देश देते हुए साफ कर दिया था कि सरकार अब और आगे किराया नहीं देगी। किराए की इमारतों को लेकर चले रहे अदालती मामलों पर भी पैसा खर्च करने के हक में नहीं है।