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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Governor Banwari Lal Purohit give permission to convene Punjab assembly session On September 27

रार पर विराम: गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित ने दी पंजाब विधानसभा सत्र को मंजूरी, 27 सितंबर को होगा सेशन

Sun, 25 Sep 2022 09:55 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 25 Sep 2022 09:55 AM IST
सार

विधानसभा सत्र बुलाने के मुद्दे पर राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और आम आदमी पार्टी की सरकार के बीच विवाद काफी बढ़ गया था।

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Punjab Governor Banwari Lal Purohit give permission to convene Punjab assembly session On September 27
पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित - फोटो : एएनआई

विस्तार

पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और राज्यपाल के बीच चल रही तकरार आखिरकार राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित की ओर से विधानसभा सत्र को अनुमति देने के बाद फिलहाल थम गई है। राज्यपाल ने दो बार की तकरार के बाद विधानसभा सत्र को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल भवन की ओर से इसको लेकर आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश में राज्यपाल ने भारतीय संविधान के आर्टिकल (1) की धारा 174 का जिक्र कर अनुमति प्रदान की है। 27 सितंबर सुबह 11:00 बजे से पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा।

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उल्लेखनीय है कि राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित पंजाब विधानसभा का 22 सितंबर को बुलाया गया विशेष सत्र रद्द कर चुके हैं। उस समय राज्यपाल और मुख्यमंत्री में इस बात को लेकर तनातनी हुई थी। इसके बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को संविधान का पाठ पढ़ाया। 
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उन्होंने सीएम को बताया कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री के काम में अंतर है। इस बात को समझने की आवश्यकता है कि विशेष सत्र क्यों किया गया और संविधान के अनुसार सत्र बुलाने की सही प्रक्रिया क्या है। इसके बाद दूसरी बार अनुमति मांगने पर राज्यपाल की ओर से प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। हालांकि सीएम भगवंत मान इस पर पहले ही प्रतिक्रिया दे चुके हैं। 

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उन्होंने कहा था कि विधानसभा के किसी भी सत्र से पहले राज्यपाल या राष्ट्रपति की सहमति एक औपचारिकता है। 75 वर्ष में किसी भी राष्ट्रपति या राज्यपाल ने सत्र बुलाने से पहले कभी विधायी कार्यों की सूची नहीं मांगी। 

गौर हो कि हाल ही में पंजाब में सामने आए ऑपरेशन लोटस के चलते आप सरकार और राज्यपाल के बीच तकरार बढ़ी है। आप ने भाजपा पर उनके विधायकों को 25-25 करोड़ रुपये में खरीदने का आरोप लगाया। इसके बाद बहुमत साबित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया। 

पहले इसे राज्यपाल की ओर से मंजूरी प्रदान की गई थी। विपक्षी विधायकों के विरोध जताने पर कानूनी राय के बाद राज्यपाल ने इसे रद्द कर दिया था। इसके बाद बिजली और पराली के मुद्दे पर बहस की बात कह सरकार ने फिर सत्र बुलाया, जिस पर फिर दोनों पक्षों में टकराव हुआ। आखिरकार अब 27 सितंबर को इसकी अनुमति दी गई है।

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