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राज्यपाल ने नहीं लौटाया बिल, सरकार ने कहा- कुछ स्पष्टीकरण मांगे हैं, जल्द दे दिए जाएंगे

Thu, 26 Dec 2019 06:29 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 26 Dec 2019 06:29 PM IST
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Punjab governor asks many questions to Punjab government
राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर, कैप्टन अमरिंदर सिंह।

पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्यपाल ने विधायकों को सीएम का सलाहकार नियुक्त करने वाला बिल नहीं लौटाया है। सिर्फ कुछ स्पष्टीकरण मांगे हैं जो जल्द दे दिए जाएंगे। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि राज्यपाल ने द पंजाब स्टेट लेजिसलेचर (प्रिवेंशन ऑफ डिस्क्वालिफिकेशन) संशोधन बिल 2019 वापस नहीं भेजा है। 

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राज्यपाल ने राज्य सरकार से कुछ स्पष्टीकरण मांगे हैं। जो छह विधायकों को सीएम के सलाहकार के तौर पर नियुक्त करने के मामले में हितों के टकराव से संबंधित हैं। राज्यपाल का पत्र सीएम कार्यालय को भेज दिया गया है। जल्द ही अपेक्षित जवाब भेज दिया जाएगा। 
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प्रवक्ता ने कहा कि नवंबर में विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र में यह बिल पास करने के बाद राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा गया था। राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने बिल के विभिन्न उपबंधों और संबंधित मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा था। संबंधित मंत्री, कार्यालयों को राज्यपाल द्वारा उठाए गए मामलों को स्पष्ट करने की हिदायत दी गई है। ताकि जल्द से जल्द उपयुक्त जवाब सौंपा जा सके। जिससे इस बिल के हितों के टकराव के उपबंधों के अंतर्गत आती श्रेणी से बाहर रखने का रास्ता साफ हो सके। 

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राज्य सरकार ने सितंबर 2019 में विधायकों फरीदकोट से कुशलदीप ढिल्लों, गिदड़बाहा से अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, टांडा उड़मुड़ से संगत सिंह गिलजियां और अमृतसर साउथ से इंदरबीर बुलारिया को राजनीतिक सलाहकार, फतेहगढ़ साहिब से कुलजीत नागरा को सलाहकार (योजना) नियुक्त कर कैबिनेट रैंक दिया था। जबकि, अटारी से विधायक तरसेम सिंह डीसी को सलाहकार (नियुक्त) कर राज्यमंत्री का दर्जा दिया था।

शिअद ने किया राज्यपाल के फैसले का स्वागत
शिरोमणि अकाली दल ने राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर द्वारा सीएम के छह सलाहकारों की नियुक्ति की फाइल वापस भेजने का स्वागत किया है। पूर्व मंत्री जनमेजा सिंह सेखों ने कहा है कि फाइल लौटा कर राज्यपाल ने संविधान के रखवाले का काम किया है। राज्यपाल ने 13 सवाल भी पूछे हैं जो इशारा करते हैं कि यह बिल संवैधानिक जांच के आगे नहीं टिकेगा। 

कांग्रेस सरकार के लिए ठीक होगा कि बिल वापस ले और संविधान के 91वें संशोधन के उल्लंघन के लिए पंजाबियों से माफी मांग ले। जिसमें लिखा है कि मंत्रियों की संख्या विधायकों की संख्या के 15 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती। सेखों ने यह भी मांग की कि इन सलाहकारों पर अब तक खर्च हुए पैसे इनसे ही वसूल कर सरकारी खजाने में जमा कराए जाएं। इनके खिलाफ अयोग्य ठहराए जाने की कार्रवाई भी की जाए।

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