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तनातनी बढ़ी: राज्यपाल ने मांगा सत्र की विधायी कार्य का ब्योरा, सीएम मान बोले- अब तो हद हो गई

Sat, 24 Sep 2022 12:35 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 24 Sep 2022 12:35 AM IST
सार

शुक्रवार को राज्यपाल के कार्यालय से विधानसभा सचिव को पत्र भेजकर विधायी कामकाज का ब्योरा देने को कहा गया है। इससे खफा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट कर कहा- विधानमंडल के किसी भी सत्र से पहले राज्यपाल की सहमति एक औपचारिकता होती है। 

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Punjab Governor asked for the details of the legislative business of the session
राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और सीएम भगवंत मान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने आप सरकार की ओर से 27 सितंबर को बुलाए गए एक दिवसीय सत्र की विधायी कार्य का विवरण मांग लिया है। इससे मान सरकार और राज्यपाल के बीच तनातनी और बढ़ गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा-अब तो हद हो गई है। 75 सालों में आज तक किसी राज्यपाल ने इस तरह की जानकारी नहीं मांगी।

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विधानसभा का विशेष सत्र रद्द किए जाने के बाद मुख्यमंत्री मान ने 27 सितंबर को विधानसभा सत्र बुलाए जाने की सिफारिश की थी। इस पर शुक्रवार को राज्यपाल के कार्यालय से विधानसभा सचिव को पत्र भेजकर विधायी कामकाज का ब्योरा देने को कहा गया है। इससे खफा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट कर कहा- विधानमंडल के किसी भी सत्र से पहले राज्यपाल की सहमति एक औपचारिकता होती है। 
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विधायी कार्य बीएसी और स्पीकर द्वारा तय किया जाता है। आगे से राज्यपाल सभी भाषणों को उनके द्वारा अनुमोदित करने को कहेंगे। यह तो हद है। हालांकि मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की बैठक में स्पष्ट किया था कि सत्र के दौरान राज्य सरकार बिजली, पराली समेत सूबे से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सदन में चर्चा करेगी। 
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ऑपरेशन लोटस के बाद बढ़ा घमासान
आप सरकार ने भाजपा पर ऑपरेशन लोटस का आरोप लगाते हुए पार्टी के 10 विधायकों को 25-25 करोड़ का ऑफर देकर उन्हें तोड़ने का आरोप लगाया था। इस संबंध में आप ने डीजीपी की समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। उसके बाद पंजाब पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला भी दर्ज किया था, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। 


उसके बाद विश्वास मत हासिल करने के लिए मान सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की अनुमति मांगी। राज्यपाल ने इसकी मंजूरी दी, लेकिन अगले ही दिन उन्होंने अपना आदेश वापस ले लिया। मान सरकार ने कैबिनेट की बैठक बुलाकर एक दिवसीय सत्र बुलाने संबंधी प्रस्ताव पारित किया और रज्यपाल की अनुमति के लिए भेजा। वहीं राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया। 

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