{"_id":"617d2a1bbf4c1479fe5ca988","slug":"punjab-government-terminate-gvk-goindwal-sahib-power-purchase-agreement","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब: जीवीके गोइंदवाल कंपनी से बिजली समझौता रद्द, सीएम ने माना पीएसपीसीएल का प्रस्ताव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब: जीवीके गोइंदवाल कंपनी से बिजली समझौता रद्द, सीएम ने माना पीएसपीसीएल का प्रस्ताव
Sat, 30 Oct 2021 04:49 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 30 Oct 2021 04:49 PM IST
सार
निजी कंपनियों से समझौते रद्द करना कांग्रेस के मैनिफेस्टों में था, जिसके लिए अब सरकार सक्रिय हुई है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी।
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब के लोगों को वाजिब दरों पर निर्विघ्न बिजली आपूर्ति के लिए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने शनिवार को जीवीके गोइंदवाल साहिब (2 गुना 270 मेगावाट) बिजली खरीद समझौता रद्द करने के पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही पावरकॉम ने कंपनी को टर्मिनेशन नोटिस भी जारी कर दिया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का कहना है कि उन्होंने उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया है।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि पावरकॉम की ओर से बिजली समझौता रद्द करने के लिए जीवीके को शुरुआती तौर पर डिफाल्ट नोटिस जारी किया जा चुका है। इस नोटिस का आधार उच्च बिजली लागतें और निर्धारित मापदंड के विपरीत खराब कारगुजारी, जीवीके से बिजली खरीद के एक साल के समय के दौरान केवल 25 से 30 प्रतिशत तक ही बिजली उपलब्धता को आधार बनाया गया है, वहीं बीते वर्ष के लिए 7.52 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली की दरें बढ़ाई गई हैं।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री चन्नी ने बताया कि यह कदम राज्य के उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित बनाने के लिए उठाया गया है। इससे बिजली की कीमतों का बोझ घटेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि जीवीके द्वारा पीएसपीसीएल से बिजली खरीद समझौता (पीपीए) करने का मूल आधार पीएसपीसीएल को सस्ती बिजली प्रदान करना था। जीवीके, ‘शक्ति’ नीति के अंतर्गत कोल इंडिया लिमिटेड से कोयले का प्रबंध करके बिजली पैदा कर रहा था। पीपीए के अनुसार जीवीके को एक कोयला खदान का प्रबंध करने की जरूरत थी, लेकिन यह ग्रिड से जुड़ने के 5 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद ऐसा करने में असफल रहा।
विज्ञापन
इसके अलावा प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग (पीएसईआरसी) की ओर से लगभग 3058 करोड़ रुपये की लागत के आधार पर क्षमता शुल्क तय किए जा रहे हैं, जो स्थिर लागत के लगभग 1.61 रुपये प्रति यूनिट के बराबर है। प्रवक्ता ने बताया कि इस फैसले के खिलाफ जाकर जीवीके ने लगभग 4400 करोड़ रुपये की पूंजीगत लागत के दावों के आधार पर 2.50 रुपये प्रति यूनिट की उच्च स्थिर लागत प्राप्त करने के लिए ऐपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (एपीटीईएल) का रुख किया, जिसका फैसला अभी आना बाकी है।
7 रुपये यूनिट बिजली बेचना चाहती है जीवीके
प्रवक्ता ने बताया कि जीवीके द्वारा किए गए दावों के अनुसार परिवर्तनीय लागत लगभग 4.50 रुपये प्रति यूनिट है और स्थिर लागत लगभग 2.50 रुपये प्रति यूनिट है। इस तरह दरों के तहत जीवीके का कुल दावा लगभग 7.00 रुपये प्रति यूनिट बनता है, जो इसकी महंगी बिजली के कारण और बढ़ता है। इससे जीवीके का इरादा स्पष्ट है कि यह उच्च दरें वसूलना चाहती है, जो पीपीए का मूल आधार नहीं है। इस कारण पीएसपीसीएल के लिए जीवीके के साथ पीपीए जारी रखना व्यापारिक तौर पर गैर-व्यवहारिक बन गया।
डिफाल्टर संपत्ति बन चुकी है जीवीके
प्रवक्ता के अनुसार जीवीके विभिन्न ऋणदाताओं से लिए गए कर्ज की समय पर अदायगी न करने के कारण डिफॉल्टर बन चुकी है। निष्कर्ष तौर पर यह एक डिफॉल्टर संपत्ति बन गई है और जीवेके द्वारा समाधान संबंधी योजना लाने की जरूरत थी, लेकिन यह ऐसा करने में भी असफल रही। प्रवक्ता ने बताया कि ऋणदाताओं ने जीवीके लिए समाधान योजना के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) से संपर्क किया है, जो ट्रिब्यूनल के समक्ष विचाराधीन है।
दलील, कंपनियां सरकार को महंगी बिजली बेच रही हैं
प्रदेश में निजी थर्मल प्लांटों को बंद करने की मांग के पीछे यह दलील दी जाती रही है कि अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय हुए 25 साल की अवधि वाले समझौतों के तहत निजी कंपनियां सरकार को महंगी बिजली बेच रही हैं। कैप्टन सरकार ने भी पिछले साल गर्मियों में बिजली की किल्लत पैदा होने पर निजी थर्मल प्लांटों को बंद करने के लिए दलील दी थी कि इन कंपनियों को हर साल 1000 करोड़ रुपये फिक्स चार्ज के रूप में देना पड़ रहा है, जिससे राज्य को कोई लाभ नहीं हो रहा। इस साल पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के निर्देश पर पीएसपीसीएल ने प्रदेश में तीन निजी थर्मल प्लांटों- तलवंडी साबो, राजपुरा और गोइंदवाल को पीपीए रद्द करने के नोटिस भेजे हैं। दरअसल, पंजाब 2020 तक पीपीए के तहत कंपनियों को 5400 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है और उसे अभी 65 हजार करोड़ रुपये का भुगतान फिक्स चार्ज के रूप में भविष्य में भी करना होगा। कांग्रेस ने 2017 के चुनाव से पहले वादा किया था कि सत्ता में आने पर पार्टी आम लोगों को सस्ती बिजली मुहैया करवाने के इरादे से तीन निजी थर्मल प्लांटों के साथ किए गए समझौतों पर पुनर्विचार करेगी और जरूरत पड़ने पर इन्हें रद्द किया जाएगा। लेकिन साढ़े चार साल बाद मुख्यमंत्री चन्नी के कार्यकाल में किसी निजी प्लांट पर पहली कार्रवाई हुई है।