चंडीगढ़। पड़छ डैम की डी सिल्टिंग को लेकर पर्यावरण मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने की पिछली सुनवाई पर दी गई दलील पंजाब सरकार को भारी पड़ गई। मंत्रालय ने कहा कि उसके पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार ने बात साबित नहीं की तो कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। पिछली सुनवाई पर सरकार ने बताया था कि डी सिल्टिंग को पर्यावरण मंत्रालय खनन मानता है, वन विभाग ने इसके लिए मंजूरी का आवेदन किया है। हाईकोर्ट ने कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर खबर पर संज्ञान लिया था, जिसके अनुसार जंगली जानवर भीषण गर्मी में पानी की तलाश करते हुए मर रहे हैं। जानवर पानी की तलाश में बांध के नजदीक आते हैं और सूखे तल पर जमा गाद में फंस जाते हैं। आसपास कोई जल स्रोत न होने के कारण ये जानवर अपना पेट भरने में असमर्थ हैं। जानवरों के भूखे प्यासे मरने का दृश्य भयावह है। इसके अलावा बांध की कमजोर स्थिति के कारण स्थानीय किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। हाईकोर्ट ने कहा था कि ये डैम इसलिए सूख गए, क्योंकि इनकी समय पर डी सिल्टिंग नहीं की गई। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने कहा था कि डैम के सूखने से वन्य जीवन ही खतरे में आ गया है। अब सरकार इनके रखरखाव के लिए जो भी कार्रवाई कर रही है, उसकी हाईकोर्ट को जानकारी दी जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि शहर में मौजूद वन और जीव-जंतुओं व वन्यजीवों की रक्षा करना इस न्यायालय का कर्तव्य है। चेक डैम का निर्माण यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि जलस्तर नीचे न जाए और भारी बारिश के दौरान पानी ओवरफ्लो न हो और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा न हो। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि स्थिति नियंत्रण में है। पर्यावरण मंत्रालय से डी सिल्टिंग के लिए अनुमति मांगी गई है, क्योंकि मंत्रालय इसे खनन मानता है।

कुरुक्षेत्र। युवा महोत्सव में नृत्य की प्रस्तुति देती कलाकार। संवाद

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