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Highcourt: मोहाली में प्रवासी मजदूरों को गांव से निकालने का मामला पहुंचा HC, पंजाब सरकार से जवाब तलब
Thu, 08 Aug 2024 10:57 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Aug 2024 10:57 PM IST
सार
गांव मुंडो संगतियां में कुछ आपराधिक घटनाओं में प्रवासी मजदूरों की संलिप्तता पाई गई थी। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि प्रवासियों को इस गांव में नहीं रहने दिया जाएगा। इसके बाद ही यह कार्रवाई शुरू की गई थी। इसके बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया था।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूपी, बिहार व राजस्थान के प्रवासी मजदूरों को मोहाली के मुंडो संगतियां गांव छोड़ने के लिए ग्राम पंचायत के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट वैभव वत्स ने बताया कि एक अगस्त को एक समाचार पत्र में खबर प्रकाशित हुई थी कि गांव की पंचायत ने प्रवासी मजदूरों को गांव छोड़ने के लिए प्रस्ताव पास किया है। हालांकि सरपंच ने इस पर दस्तखत होने से इन्कार किया था।
समाचार के अनुसार गांव में कुछ आपराधिक घटनाओं में प्रवासी मजदूरों की संलिप्तता पाई गई थी। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि प्रवासियों को इस गांव में नहीं रहने दिया जाएगा। इसके बाद ही यह कार्रवाई शुरू की गई थी।
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ऐसे लोग जो एक दशक से भी अधिक समय से किराए पर रह रहे थे और अच्छे आचरण वाले थे, उन्हें भी गांव खाली करने को कह दिया गया। याची ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को मर्जी के स्थान पर रहने का अधिकार देता है। इस प्रकार गांव निकाला देकर प्रवासी मजदूरों के सांविधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर पंजाब सरकार को अगली सुनवाई के दौरान पक्ष रखने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट वैभव वत्स ने बताया कि एक अगस्त को एक समाचार पत्र में खबर प्रकाशित हुई थी कि गांव की पंचायत ने प्रवासी मजदूरों को गांव छोड़ने के लिए प्रस्ताव पास किया है। हालांकि सरपंच ने इस पर दस्तखत होने से इन्कार किया था।
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समाचार के अनुसार गांव में कुछ आपराधिक घटनाओं में प्रवासी मजदूरों की संलिप्तता पाई गई थी। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि प्रवासियों को इस गांव में नहीं रहने दिया जाएगा। इसके बाद ही यह कार्रवाई शुरू की गई थी।
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ऐसे लोग जो एक दशक से भी अधिक समय से किराए पर रह रहे थे और अच्छे आचरण वाले थे, उन्हें भी गांव खाली करने को कह दिया गया। याची ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को मर्जी के स्थान पर रहने का अधिकार देता है। इस प्रकार गांव निकाला देकर प्रवासी मजदूरों के सांविधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर पंजाब सरकार को अगली सुनवाई के दौरान पक्ष रखने का आदेश दिया है।