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नौकरी मांगने निकला युवक बोला- मेरे पिता शहीद, सरकार ने किया इंकार... जबकि इसका प्रावधान है
Thu, 24 Sep 2020 12:55 PM IST
खुशबू गोयल
नवनीत छिब्बर, मोहाली
नवनीत छिब्बर, मोहाली
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 24 Sep 2020 12:55 PM IST
सार
- राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड के अनुसार, शहीदों के परिजनों के लिए है नौकरी का प्रावधान
- बोर्ड के पास ऐसे छह मामले लंबित, जल्दी निपटाने का दावा, 12 को दी जा चुकी नौकरी
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
एक दिवंगत फौजी का बेटा नौकरी मांगने निकला तो वादे करने वाली सरकार के हर दरवाजे से उसकी अर्जी खारिज हो गई। दिवंगत फौजी की पत्नी का कहना है कि उनके पति 1995 में बॉर्डर पर दो गालियां लगने से शहीद हुए थे। जबकि राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड का कहना है कि फौजी की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई थी और नौकरी दिए जाने का प्रावधान सिर्फ युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों के लिए है।
होशियारपुर जिले की तहसील दसूहा के गांव मयाणी का युवक दविंदर सिंह अपने पिता सुखदेव सिंह की शहादत के बदले परिवार के लिए रोजगार मांग रहा है। दविंदर सिंह का कहना है कि उसका जन्म 1994 में हुआ था और वह तब एक साल का था जब पिता शहीद हो गए थे। उसके पिता सुखदेव सिंह सिख लाई रेजिमेंट में थे।
पिता को सिर्फ तस्वीरों में ही देखा
दविंदर का कहना है कि उसने तो अपने पिता को सिर्फ तस्वीरों में ही देखा है जबकि छोटी बहन का जन्म पिता के देहांत के बाद हुआ। उसके परिवार को आज तक यही बताया गया है कि उसके पिता बॉर्डर पर शहीद हुए थे। सरकारी रिकार्ड में उनकी माता को वॉर विडो का दर्जा प्राप्त है। पिता की रेजिमेंट ने भी परिवार को गोली लगने से शहादत होने संबंधी बताया था। दविंदर की माता सर्बजीत कौर बताती हैं कि उनके पति को दो गोलियां लगी थीं।
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उनका अंतिम संस्कार भी एक शहीद की तरह ही हुआ था। सर्बजीत खुद निरक्षर हैं, इसलिए उस समय परिवार में कोई नौकरी के लायक नहीं था। सर्बजीत के अनुसार वर्ष 2000 तक सरकार की तरफ से नौकरी के लिए पत्राचार होता रहा था। अब बेटा नौकरी के लायक हुआ है तो उसे नौकरी नहीं दी जा रही। उन्होंने इस संबंधी राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड को शिकायत दी है।
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होशियारपुर जिले की तहसील दसूहा के गांव मयाणी का युवक दविंदर सिंह अपने पिता सुखदेव सिंह की शहादत के बदले परिवार के लिए रोजगार मांग रहा है। दविंदर सिंह का कहना है कि उसका जन्म 1994 में हुआ था और वह तब एक साल का था जब पिता शहीद हो गए थे। उसके पिता सुखदेव सिंह सिख लाई रेजिमेंट में थे।
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पिता को सिर्फ तस्वीरों में ही देखा
दविंदर का कहना है कि उसने तो अपने पिता को सिर्फ तस्वीरों में ही देखा है जबकि छोटी बहन का जन्म पिता के देहांत के बाद हुआ। उसके परिवार को आज तक यही बताया गया है कि उसके पिता बॉर्डर पर शहीद हुए थे। सरकारी रिकार्ड में उनकी माता को वॉर विडो का दर्जा प्राप्त है। पिता की रेजिमेंट ने भी परिवार को गोली लगने से शहादत होने संबंधी बताया था। दविंदर की माता सर्बजीत कौर बताती हैं कि उनके पति को दो गोलियां लगी थीं।
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उनका अंतिम संस्कार भी एक शहीद की तरह ही हुआ था। सर्बजीत खुद निरक्षर हैं, इसलिए उस समय परिवार में कोई नौकरी के लायक नहीं था। सर्बजीत के अनुसार वर्ष 2000 तक सरकार की तरफ से नौकरी के लिए पत्राचार होता रहा था। अब बेटा नौकरी के लायक हुआ है तो उसे नौकरी नहीं दी जा रही। उन्होंने इस संबंधी राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड को शिकायत दी है।
बोर्ड के पास छह मामले लंबित
उधर, राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड परिवार के दावे पर ही सवाल खड़े कर रहा है। बोर्ड के डायरेक्टर रिटायर्ड ब्रिगेडियर सतिंदर पाल सिंह का कहना है कि आर्मी जांच रिपोर्ट के अनुसार सिख लाई रेजिमेंट के जवान सुखदेव सिंह की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। जिस आधार पर परिवार नौकरी मांग रहा है, वह आधार सिर्फ युद्ध शहीदों के आश्रितों के लिए है।
इस आधार पर दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत के मामले में यह सुविधा नहीं मिल सकती है। बोर्ड के डायरेक्टर रिटा. ब्रिगेडियर सतिंदर पाल सिंह के अनुसार आश्रितों के मामलों को बोर्ड जल्द से जल्द निपटाने का प्रयास करता है। आश्रितों को नौकरी दिलाने के लिए सरकारी अधिकारियों के साथ इस साल में तीन बैठकें हो चुकी हैं। 12 परिवारों को नौकरी भी दी जा चुकी है। कोविड-19 के कारण काम बाधित होने से बोर्ड के पास छह मामले लंबित हैं, जिनका निपटारा भी जल्द हो जाएगा।
इस आधार पर दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत के मामले में यह सुविधा नहीं मिल सकती है। बोर्ड के डायरेक्टर रिटा. ब्रिगेडियर सतिंदर पाल सिंह के अनुसार आश्रितों के मामलों को बोर्ड जल्द से जल्द निपटाने का प्रयास करता है। आश्रितों को नौकरी दिलाने के लिए सरकारी अधिकारियों के साथ इस साल में तीन बैठकें हो चुकी हैं। 12 परिवारों को नौकरी भी दी जा चुकी है। कोविड-19 के कारण काम बाधित होने से बोर्ड के पास छह मामले लंबित हैं, जिनका निपटारा भी जल्द हो जाएगा।