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चुनावों से पहले सरकार 30,000 कर्मचारियों को दे सकती है बड़ा तोहफा

Sun, 27 Nov 2016 09:34 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 27 Nov 2016 09:34 AM IST
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Punjab government, policy formulated, under Governor for approval
- फोटो : File Photo
पंजाब सरकार ने रेगुलराइजेशन पालिसी के तहत तैयार बिल को मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेज दिया है। इसकी मंजूरी मिलते ही 30000 कर्मचारियों के नियमित करने का रास्ता साफ हो जाएगा। सत्ताधारी दल का यह चुनावी वादा था, जिसे सरकार विधानसभा चुनाव में पहले पूरा करना चाह रही है।
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हालांकि, नियमित किए जाने वाले कर्मचारियों को राज्य सरकार फिलहाल बेसिक वेतन ही लागू करेगी। यदि सरकार ने उमा देवी मामले में सुप्रीमकोर्ट के फैसले के आधार पर नियमित किए कर्मचारियों को नियमित वेतन भी दिया तो सरकार पर पहले साल में ही 2500 करोड़ से अधिक का वित्तीय बोझ पड़ जाएगा।
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इस मामले में पंजाब मंत्रिमंडल ने पहले बी, सी व डी वर्ग के27 हजार कर्मचारियों को नियमित करने का फैसला लिया था, लेकिन बाद में इसमें ए वर्ग के कच्चे कर्मचारियों को भी जोड़ दिया गया। लीगल रीमेंबरेंस (एलआर) से मंजूरी मिलने के बाद पर्सोनल विभाग ने यह बिल वित्त विभाग को भेजा था, जहां से मंजूरी मिलने केबाद सरकार ने अब यह बिल राज्यपाल के पास भेज दिया है।
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ए, बी, सी व डी वर्ग के कच्चे कर्मचारियों को होगा लाभ

Punjab government, policy formulated, under Governor for approval
सुखबीर बादल - फोटो : File Photo
2006 से पहले नियमानुसार भरती कर्मियों को ही लाभ
एलआर ने साफ कर दिया है कि नियमित किए जाने के फैसले का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिल सकेगा, जिनकी नियुक्ति ठेका आधार पर पूरे नियमानुसार हुई होगी। बैकडोर एंट्री कर नौकरी पर लगे कर्मचारी इसका लाभ नहीं ले सकेंगे।

वहीं, पंजाब के महाधिवक्ता ने राज्य सरकार को भेजी अपनी राय में कहा है कि उमादेवी केस में वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद, केवल उन्हीं कर्मचारियों को नियमित किया जा सकता है, जिनकी नियुक्ति 2006 से पहले हो चुकी है। महाधिवक्ता की इस राय पर एलआर ने भी सहमति जता दी है। जाहिर है, प्रदेश सरकार कर्मचारियों को नियमित किए जाने के मामले में किसी कानूनी पचड़े से बचना चाहेगी।
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