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550वें प्रकाश पर्व की तैयारियों को लेकर पंजाब सरकार का रवैया रुखा, आयोजन में नहीं दे रही पूरा साथ

Sat, 07 Sep 2019 09:52 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 07 Sep 2019 09:52 AM IST
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Punjab Government Not Helping in Preparations of 550th Prakash Parv celebration
बैठक में हिस्सा लेते गोबिंद सिंह लोंगोवाल - फोटो : अमर उजाला
श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले धार्मिक समागमों में पंजाब सरकार बेरुखी अपना रही है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा दिए गए निर्देश के बावजूद बीते महीने तालमेल कमेटी की आयोजित बैठक में पंजाब सरकार ने अपने प्रतिनिधि नहीं भेजे।
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एसजीपीसी अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह को छह सितंबर की बैठक में दो प्रतिनिधि भेजने के लिखे पत्र का भी कोई असर नहीं हुआ। पंजाब सरकार के इस रवैये के बाद भाई लौंगोवाल ने शुक्रवार को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को एक पत्र लिख कर पंजाब सरकार की बेरुखी के बारे में जानकारी देते हुए नए आदेश जारी करने की अपील की है।
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एसजीपीसी स्थित अपने दफ्तर में मीडिया से बातचीत में भाई लौंगोवाल ने कहा कि पंजाब सरकार श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को एसजीपीसी-पंजाब सरकार द्वारा सयुंक्त रूप से आयोजित करने के प्रयासों को सफल नहीं होने देना चाहती। अकाल तख्त साहिब के आदेश के बाद गठित की गई तालमेल कमेटी में पंजाब सरकार ने दो बैठकों 18 जुलाई व 14 अगस्त में अपने प्रतिनिधि नहीं भेजे।
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उन्होंने 16 अगस्त को कैप्टन अमरिंदर को इस संदर्भ में पत्र भी लिखे और उनकी अगुवाई में एसजीपीसी का वफद कैप्टन अमरिंदर सिंह से चंडीगढ़ में मिला भी था। तब कैप्टन ने आश्वासन दिया था कि वह दो प्रतिनिधियों के नाम भेज देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

भाई लौंगोवाल ने कहा कि एसजीपीसी प्रकाश पर्व के सभी कार्यक्रम एकजुटता से आयोजित करना चाहती है। मुख्य कार्यक्रम श्री अकाल तख्त साहिब की अगुवाई में आयोजित किए जाएं। इन कार्यक्रमों का प्रबंध एसजीपीसी करे। पंजाब सरकार प्रकाश पर्व के कार्यक्रमों में एसजीपीसी का सहयोग करे। भाई लौंगोवाल ने विश्वास दिलाया कि सभी समारोहों में देश-विदेश से पहुंचे गणमान्यों का सम्मान किया जाएगा। भाई लौंगोवाल ने कैप्टन अमरिंदर से अपील की कि इस धार्मिक मामले को वह गंभीरता से लें।

कैप्टन की बेरुखी पैदा कर सकती है धार्मिक संकट तालमेल कमेटी के लिए दो सरकारी प्रतिनिधि न भेजने का मामला श्री अकाल तख्त साहिब पहुंच गया है। कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा प्रतिनिधि न भेजने से श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों की जा रही अवज्ञा के बाद भाई लौंगोवाल द्वारा जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को लिखे पत्र से धार्मिक संकट पैदा हो सकता है। जत्थेदार इस पत्र पर क्या निर्णय करते हैं, इसका पता तो बाद में चलेगा।

स्पष्ट है कि पंजाब सरकार द्वारा की जा रही अनदेखी से वैसा ही संकट पैदा होने की आशंका पैदा हो गई जैसा धार्मिक संकट खालसा पंथ के त्रि-शताब्दी कार्यक्रमों के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और जत्थेदार भाई रंजीत सिंह के बीच पैदा हुआ था। अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार के तीन मंत्रियों व एसजीपीसी के अध्यक्ष साहिब सहित वरिष्ठ सदस्यों के बीच एक बैठक करवाई थी। इसमें उन्होंने निर्देश दिए थे कि गुरुद्वारा साहिब के भीतर का प्रबंध एसजीपीसी व बाहर का प्रबंध पंजाब सरकार करे। इसके लिए तालमेल कमेटी की बैठक में निर्णय किए जाएं।

पीएम मोदी को न्योता देने के बाद पैदा हुआ था विवाद
पंजाब सरकार की बेरुखी का मुख्य कारण भाई लौंगोवाल द्वारा प्रकाश पर्व के कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता देने के लिए शिअद के अध्यक्ष व सांसद सुखबीर बादल, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल सहित अकाली दल के वरिष्ठ सदस्यों के अपने साथ लेकर गए थे। प्रधानमंत्री को दिए न्योते के बाद मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने इस पर आपत्ति उठाई थी।
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