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Punjab: जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों को एसवाईएल पर लिखने होंगे 2000 शब्द, सरकार ने जारी किया आदेश
Mon, 16 Oct 2023 08:37 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 16 Oct 2023 08:37 AM IST
सार
सरकार ने साफ कर दिया है कि एसवाईएल के बारे में इंजीनियरों की ओर से लिखे जाने वाले ये नोट जल संसाधन विभाग के पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एसवाईएल नहर के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं के रुख के लिए उनकी आलोचना करते हुए कहा कि नहर के लिए पंजाब को आवंटित भूमि के सर्वेक्षण की अनुमति देने के लिए सुनील जाखड़, सुखबीर बादल, प्रताप बाजवा को खुद पर शर्म आनी चाहिए।
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विस्तार
सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मुद्दे पर खींचतान के बीच पंजाब सरकार ने एक आदेश जारी कर जल संसाधन विभाग के सभी इंजीनियरों से एसवाईएल नहर के बारे में 1500 से 2000 शब्द लिखने को कहा है।
13 मार्च को जल संसाधन विभाग की ओर से इंजीनियरों को एक पत्र जारी करते हुए लिखा गया था कि पंजाब के जल संसाधन विभाग के अधिकांश इंजीनियरों को एसवाईएल और अंतरराज्यीय जल मुद्दों के बारे में जानकारी नहीं है।
यह भी पढ़ें: Punjab: बच्ची से यौन उत्पीड़न के आरोप में मेजर को पांच साल की कैद, सेवा से बर्खास्तगी की सिफारिश
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इसी संदर्भ में राज्य सरकार ने अब एक आदेश जारी कर विभाग के सभी इंजीनियरों को एसवाईएल के बारे में 1500 से 2000 शब्द लिखने को कहा है, जिसमें एसवाईएल का इतिहास, मौजूदा समझौता, विभाजन से पूर्व स्थिति, वर्तमान परिदृश्य और भविष्य के बारे में सुझाव शामिल हों।
सरकार ने साफ कर दिया है कि एसवाईएल के बारे में इंजीनियरों की ओर से लिखे जाने वाले ये नोट जल संसाधन विभाग के पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस पोर्टल का सुप्रीम कोर्ट के एसवाईएल सर्वे से कोई लेना-देना नहीं है।
सीएम ने की विपक्ष की आलोचना
इस बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एसवाईएल नहर के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं के रुख के लिए उनकी आलोचना करते हुए कहा कि नहर के लिए पंजाब को आवंटित भूमि के सर्वेक्षण की अनुमति देने के लिए सुनील जाखड़, सुखबीर बादल, प्रताप बाजवा को खुद पर शर्म आनी चाहिए। इधर, पंजाब में एसवाईएल नहर विवाद के बीच आप सरकार ने केंद्र की ओर से भेजी जाने वाली सर्वेक्षण टीम के आगमन को अस्वीकार कर दिया है और एसवाईएल नहर के लिए भूमि के किसी भी सर्वेक्षण की अनुमति से इन्कार कर दिया है।
शिअद का आरोप है कि पंजाब के जल संसाधन विभाग के पोर्टल पर एक मॉड्यूल एसवाईएल नहर सर्वेक्षण का संकेत देता है। वहीं, पंजाब सरकार ने मॉड्यूल का बचाव करते हुए कहा कि इसे एसवाईएल नहर मुद्दे के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए लॉन्च किया गया था और इसका नहर के निर्माण के संबंध में हाल के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कोई संबंध नहीं है।
आखिरकार बहस के पीछे का शैतान बाहर आया
शिअद ने जल संसाधन विभाग के पोर्टल पर अपलोड किए मॉड्यूल को एसवाईएल नहर सर्वेक्षण का संकेत करार देते हुए कहा है कि एसवाईएल के मुद्दे पर बहस की मांग के पीछे का शैतान आखिरकार बाहर आ गया है।
पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा है कि मुख्यमंत्री विरोधियों को बहस का न्योता देने का प्रचार कर पंजाबियों का ध्यान दरियाई पानी के मुद्दे से हटाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि इस नाटक के पीछे उनके असली मकसद का एक ठोस सबूत मिल गया है। मान ने एसवाईएल नहर के निर्माण के सर्वेक्षण के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है। इस साजिश को छिपाने और पंजाबियों को बेवकूफ बनाने के लिए एसवाईएल सर्वे के आदेश को जानबूझकर सूची में क्रम संख्या 32 पर रखा है। ऐसा इसलिए किया है, ताकि किसी को पता न चले। पार्टी ने साफ किया कि शिअद और पंजाब के लोग यह सर्वे कभी नहीं होने देंगे, चाहे इसके लिए कितनी भी कीमत चुकानी पड़े। शिअद ने कहा है कि पंजाब सरकार इस आदेश को तुरंत वापस ले अन्यथा पूरे पंजाब का आक्रोश झेलने के लिए तैयार रहे।
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13 मार्च को जल संसाधन विभाग की ओर से इंजीनियरों को एक पत्र जारी करते हुए लिखा गया था कि पंजाब के जल संसाधन विभाग के अधिकांश इंजीनियरों को एसवाईएल और अंतरराज्यीय जल मुद्दों के बारे में जानकारी नहीं है।
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इसी संदर्भ में राज्य सरकार ने अब एक आदेश जारी कर विभाग के सभी इंजीनियरों को एसवाईएल के बारे में 1500 से 2000 शब्द लिखने को कहा है, जिसमें एसवाईएल का इतिहास, मौजूदा समझौता, विभाजन से पूर्व स्थिति, वर्तमान परिदृश्य और भविष्य के बारे में सुझाव शामिल हों।
सरकार ने साफ कर दिया है कि एसवाईएल के बारे में इंजीनियरों की ओर से लिखे जाने वाले ये नोट जल संसाधन विभाग के पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस पोर्टल का सुप्रीम कोर्ट के एसवाईएल सर्वे से कोई लेना-देना नहीं है।
सीएम ने की विपक्ष की आलोचना
इस बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एसवाईएल नहर के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं के रुख के लिए उनकी आलोचना करते हुए कहा कि नहर के लिए पंजाब को आवंटित भूमि के सर्वेक्षण की अनुमति देने के लिए सुनील जाखड़, सुखबीर बादल, प्रताप बाजवा को खुद पर शर्म आनी चाहिए। इधर, पंजाब में एसवाईएल नहर विवाद के बीच आप सरकार ने केंद्र की ओर से भेजी जाने वाली सर्वेक्षण टीम के आगमन को अस्वीकार कर दिया है और एसवाईएल नहर के लिए भूमि के किसी भी सर्वेक्षण की अनुमति से इन्कार कर दिया है।
शिअद का आरोप है कि पंजाब के जल संसाधन विभाग के पोर्टल पर एक मॉड्यूल एसवाईएल नहर सर्वेक्षण का संकेत देता है। वहीं, पंजाब सरकार ने मॉड्यूल का बचाव करते हुए कहा कि इसे एसवाईएल नहर मुद्दे के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए लॉन्च किया गया था और इसका नहर के निर्माण के संबंध में हाल के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कोई संबंध नहीं है।
आखिरकार बहस के पीछे का शैतान बाहर आया
शिअद ने जल संसाधन विभाग के पोर्टल पर अपलोड किए मॉड्यूल को एसवाईएल नहर सर्वेक्षण का संकेत करार देते हुए कहा है कि एसवाईएल के मुद्दे पर बहस की मांग के पीछे का शैतान आखिरकार बाहर आ गया है।
पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा है कि मुख्यमंत्री विरोधियों को बहस का न्योता देने का प्रचार कर पंजाबियों का ध्यान दरियाई पानी के मुद्दे से हटाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि इस नाटक के पीछे उनके असली मकसद का एक ठोस सबूत मिल गया है। मान ने एसवाईएल नहर के निर्माण के सर्वेक्षण के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है। इस साजिश को छिपाने और पंजाबियों को बेवकूफ बनाने के लिए एसवाईएल सर्वे के आदेश को जानबूझकर सूची में क्रम संख्या 32 पर रखा है। ऐसा इसलिए किया है, ताकि किसी को पता न चले। पार्टी ने साफ किया कि शिअद और पंजाब के लोग यह सर्वे कभी नहीं होने देंगे, चाहे इसके लिए कितनी भी कीमत चुकानी पड़े। शिअद ने कहा है कि पंजाब सरकार इस आदेश को तुरंत वापस ले अन्यथा पूरे पंजाब का आक्रोश झेलने के लिए तैयार रहे।