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अमृतसर हादसे के बाद जागी सरकार, अब मनमाने ढंग से नहीं कर सकेंगे सार्वजनिक आयोजन

Wed, 07 Nov 2018 12:27 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 07 Nov 2018 12:27 AM IST
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Punjab government issued guide line about public event
अमृतसर हादसा

पंजाब में किसी भी सार्वजनिक स्थान पर समारोह, प्रदर्शनों का आयोजन मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकेगा। व्यक्ति विशेष, सामाजिक संगठन हो या सियासी दल, हर किसी को सार्वजनिक आयोजन के लिए संबंधित क्षेत्र में अथॉरिटी से न सिर्फ मंजूरी लेनी होगी बल्कि सार्वजनिक आयोजन से इलाके में यातायात जाम, गंदगी व पर्यावरण प्रदूषण न होने देने की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ेगी।

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 खास बात यह भी है कि आयोजन के लिए सात दिन पहले अनुमति लेनी होगी, हालांकि किसी खास मौके के मद्देनजर यह अनुमति दो दिन पहले भी ली जा सकेगी। लेकिन संबंधित अथॉरिटी लिखित तौर पर कारण बताते हुए आयोजन को अनुमति देने से इंकार भी कर सकती है। अगर किसी सार्वजनिक आयोजन के दौरान हिंसा, सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचता तो है आयोजक के खिलाफ तुरंत एफआईआर भी दर्ज होगी।
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पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के निर्देश पर मंगलवार को गृह मामले और न्याय विभाग ने जुलूसों, भीड़, प्रदर्शन, धरनों और मोर्चों के साथ-साथ त्योहारों के दौरान बड़े स्तर पर लोगों के एक स्थान पर जमावड़े के नियंत्रण के लिए डिप्टी कमिश्नरों, जिला पुलिस प्रमुखों और पुलिस कमिश्नरों को व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। अमृतसर रेल हादसे में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने गृह सचिव एनएस कलसी को विस्तृत दिशा निर्देश तैयार करने को कहा था। इसमें धार्मिक और सामाजिक समारोह के लिए आज्ञा लेने के लिए दिशा निर्देश तैयार करने के निर्देश भी थे ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

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पंजाब असेंबलिंग एंड प्रोसेशन गाइडलाइंस/एडवाइजरीज-2018 में कहा गया है कि किसी भी सार्वजनिक आयोजन के लिए जिस अथॉरिटी को अनुमति के लिए अर्जी दी गई है, वह पुलिस, म्युनिसिपल कारपोरेशन, पीडब्ल्यूडी, पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड आदि जैसे अन्य संबंधित विभागों/अथॉरिटी से एनओसी, आज्ञा या टिप्पणी प्राप्त करने के बाद अनुमति देंगे। दिशा निर्देशों में यह भी जरूरी बनाया गया है कि अगर किसी मामले में संबंधित स्थान के नजदीक पेट्रोल पंप या तेल, गैस  डिपो स्थित है तो उस मामले में एनओसी/आज्ञा आदि संबंधित जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस कमिश्नर से प्राप्त करनी होगी।

 इसी तरह रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, हवाई अड्डे आदि जैसे केंद्र सरकार व अन्य विभाग से भी आवश्यक इजाजत लेना जरूरी होगा। अगर भारत सरकार के किसी भी विभाग की मिलकियत वाली जगह या बुनियादी ढांचे पर कोई समारोह या जुलूस का प्रस्ताव है, तो उसकी आज्ञा भी लेनी होगी। दिशा निर्देशों के अनुसार, अनुमति प्रदान करते हुए संबंधित आथॉरिटी आयोजकों के रूट पर सार्वजनिक आर्डर, सार्वजनिक सुरक्षा, साफ-सफाई और वातावरण की सुरक्षा के अलावा संकटकालीन स्थिति आदि से निपटने के लिए प्रभावी प्रबंधों से जुड़े कारकों पर भी विचार करेगी।

 

इसके साथ ही संबंधित अथॉरिटी यह भी यकीनी बनाएगी कि आयोजक और इसमें शामिल होने वाले लोग निजी संपत्ति की तोड़फोड़ में शामिल न हों और विभिन्न मामलों में अदालत द्वारा दिए गए संशोधनों और विभिन्न कानूनों का पालन करें। इसमें यह भी यकीनी बनाया जाएगा कि विस्फोटक एक्ट, विस्फोटक पदार्थ एक्ट का उल्लंघन न हो, खासकर पटाखों की बिक्री, खरीद, स्टोरेज, ढुलाई और पटाखे चलाने के अलावा पेट्रोल/डीजल/गैस आदि जैसे ज्वलनशील पदार्थो के संबंध में संबंधित क्षेत्र के फायर अफसर को आग की घटनाएं रोकने के लिए सभी एहतियाती और सुरक्षा के उपाय करने होंगे।

आयोजन करने वाला व्यक्ति, संगठन, सियासी दल होगा जिम्मेदार
दिशा निर्देश में यह भी यकीनी बनाया गया है कि संबंधित अथॉरिटी व्यक्तियों/समुदायों के आम जनजीवन में कोई बाधा न पड़ने देना भी सुनिश्चित करेगी। यातायात में रुकावट और अराजकता, आयोजकों के लाउडस्पीकरों के जरिए ध्वनि प्रदूषण, कूड़ा-कर्कट आदि फेंकने से वातावरण प्रदूषित होने से रोकना भी अथॉरिटी द्वारा यकीनी बनाया जाएगा। यह भी कहा गया है कि शुरू से अंत तक पूरे समारोह की वीडियोग्राफी जिला अथॉरिटी/पुलिस द्वारा आयोजकों की लागत से होगी।

जो कोई व्यक्ति या संगठन या सियासी पार्टी सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किसी हिंसक विरोध को उकसाती है या उसके द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के परिणामस्वरूप सार्वजनिक/निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो इस संबंध में एफआईआर नेताओं के नाम पर या उस विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की जाएगी। अगर किसी मामले में ऐसा आयोजन अधिकृत प्रवक्ता द्वारा या अधिकृत सोशल मीडिया अकाउंट पेज के जरिए व्यक्ति, सियासी पार्टी या संगठन द्वारा किया जाता है तो उसके आरोप उस राजनैतिक पार्टी या संगठन के मुख्य अधिकारी के विरुद्ध दर्ज किए जाएंगे।

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