पंजाब: सरकारी कर्मचारियों को झटका, 31 अगस्त तक छठे वेतन आयोग का कार्यकाल बढ़ा
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को एक जुलाई 2021 तक लागू करने को कहा था। अब सरकार ने एक बार फिर वेतन आयोग का कार्यकाल बढ़ा दिया है। पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने भी इस बजट के दौरान छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का एलान किया था।
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पंजाब के छठे वेतन आयोग को लेकर हास्यास्पद स्थिति बन गई है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से जहां इस वेतन आयोग की सिफारिशों को इसी साल एक जुलाई से लागू करने का एलान किया जा चुका है, वहीं बीते सोमवार राज्य की मुख्य सचिव ने नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया कि छठे वेतन आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त, 2021 तक बढ़ाया जा रहा है।
इससे पहले सरकार ने गत एक अप्रैल को जारी नोटिफिकेशन को जारी रखते हुए छठे वेतन आयोग का कार्यकाल 31 मई, 2021 तक बढ़ा दिया था। हालांकि उस समय मुख्यमंत्री की ओर से एलान किया गया था कि मई माह के आखिरी हफ्ते में कैबिनेट की बैठक में आयोग की सिफारिशों को लागू करने का फैसला ले लिया जाएगा लेकिन बीते सप्ताह हुई कैबिनेट की बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया और सरकार के मुलाजिम इंतजार ही करते रह गए। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री ने वर्ष 2021-22 के बजट में एलान किया था कि इस साल छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर दी जाएंगी।
आयोग ने सरकार को सौंप दी हैं सिफारिशें
दरअसल, गत अप्रैल में ही छठे वेतन आयोग ने राज्य सरकार को अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं। इनमें आयोग ने पंजाब सरकार के सभी मुलाजिमों के वेतन में दोगुना से अधिक वृद्धि करने की सिफारिश की है। आयोग ने मुख्यमंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट में न्यूनतम वेतन 6950 से बढ़ाकर 18000 रुपये मासिक करने के साथ-साथ विभिन्न भत्तों में भी इजाफा करने की सिफारिश की है। आयोग ने नए वेतनमान एक जनवरी, 2016 से लागू करने को कहा है।
आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार मुलाजिमों के वेतन और पेंशन में औसतन करीब 20 प्रतिशत का विस्तार हो सकता है, जोकि पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुकाबले वेतन में 2.59 गुना का विस्तार है। कुछ भत्तों में रेशनलाइजेशन के साथ बड़े भत्तों को डेढ़ से दोगुना बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री ने अध्ययन के लिए वित्त विभाग को भेज दिया है और यह निर्देश दिया कि इस पर अगली कार्रवाई के लिए इसी महीने कैबिनेट में पेश किया जाए।
छह साल से नए वेतनमान का इंतजार कर रहे मुलाजिम
सरकारी मुलाजिम बीते छह साल से इस आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे थे। पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय फरवरी, 2016 में वेतन आयोग का गठन किया गया था। तब सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव आरएस मान के नेतृत्व में आयोग का तीन सदस्यीय पैनल बनाया था लेकिन इसके दो सदस्यों की नियुक्ति में ही नौ माह का समय बीत गया और दोनों सदस्यों की नियुक्ति नवंबर, 2016 में हो सकी।
इसके बाद आयोग अपना कामकाज शुरू कर पाता लेकिन राज्य में सरकार बदल गई। कैप्टन के नेतृत्व में नई सरकार के सत्ता संभालने के कुछ समय बाद आरएस मान ने व्यक्तिगत कारणों से आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। तब कैप्टन सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव जय सिंह गिल को आयोग की कमान सौंपी और आयोग ने काम करना शुरू किया।
खास बात यह रही कि राज्य सरकार ने आयोग को कोई कार्यालय स्टाफ नहीं दिया। जनवरी, 2019 में आयोग ने सभी विभागों से कर्मचारियों संबंधी डाटा तलब किया था लेकिन यह डाटा कंपाइल करने के लिए आयोग को स्टाफ ही नहीं दिया गया। नतीजतन प्रदेश के 3.5 लाख कर्मचारियों का डाटा कंपाइल करने का काम कछुआ चाल से आगे बढ़ा। इसके बाद सरकार ने 31 दिसंबर, 2019 तक आयोग का कार्यकाल बढ़ाया और फिर छह-छह माह के लिए कार्यकाल में आज तक इजाफा किया जाता रहा।