Punjab: हाईकोर्ट में छलकी ग्रामीणों की पीड़ा, सरकार ने गठित की चार कमेटियां, किसानों ने जताई संतुष्टि
हाईकोर्ट ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि भूजल फैक्टरी से निकलने वाले केमिकल से दूषित है या फिर इसके लिए कोई अन्य कारक जिम्मेदार है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। ऐसे में सभी पक्षों की सहमति के चलते फिलहाल विवाद थमता नजर आ रहा है।
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जीरा में शराब फैक्टरी के विरोध प्रदर्शन के मामले में प्रदर्शनकारियों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में कहा कि फैक्टरी मालिक अपने आप को दोषी नहीं मानते न ही उन्हें प्रदूषण दिखाई दे रहा है। एक बार वह अपने परिवार के साथ हमारे गांव में आकर हमारे साथ रहें और जो पानी हम पी रहें हैं पीकर देखें तो उन्हें असली हालात पता चलें। हालांकि पंजाब सरकार द्वारा विशेषज्ञों की चार कमेटी के गठन की जानकारी पर प्रदर्शनकारी व फैक्टरी मालिकों ने संतुष्टि जताई और ऐसे में हाईकोर्ट के दखल से विवाद थम रहा है।
हाईकोर्ट ने कमेटियों को छह सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। शुक्रवार को सुनवाई शुरू होते ही प्रदर्शनकारियों की तरफ से कहा गया कि यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है जो पर्यावरण से जुड़ा है। फैक्टरी के नजदीक कई गांव के लोग फैक्टरी से होने वाले प्रदूषण से बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में इस फैक्टरी से हो रहे प्रदूषण की उच्चस्तरीय जांच बेहद जरूरी है। इस पर पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की चार कमेटियां बनाने का निर्णय लिया है।
पंजाब सरकार की इस जानकारी पर ग्रामीणों ने अपनी संतुष्टि जता दी। इस दौरान फैक्टरी की ओर से कहा गया कि वह चाहते हैं कि उनका भी प्रतिनिधि इस कमेटी का हिस्सा हो। हाईकोर्ट ने कहा कि यह कमेटी कोर्ट की बनाई नहीं है। इस पर पंजाब सरकार ने कहा कि वह फैक्टरी के प्रतिनिधि को कमेटी में शामिल करने को तैयार हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि भूजल फैक्टरी से निकलने वाले केमिकल से दूषित है या फिर इसके लिए कोई अन्य कारक जिम्मेदार है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। ऐसे में सभी पक्षों की सहमति के चलते फिलहाल विवाद थमता नजर आ रहा है।
ये कमेटियां की गई हैं गठित
जल प्रदूषण और आम लोगों की शिकायतों के लिए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन की अध्यक्षता में तीन सदस्यों वाली कमेटी गठित की गई है। कैंसर और हेपेटाइटिस-बी के बढ़ते मामलों की जांच के लिए एम्स बठिंडा के कम्युनिटी मेडिसिन के हेड प्रोफेसर राकेश कक्कड़ की अध्यक्षता में चार सदस्यों वाली कमेटी गठित की गई है।
मिट्टी और फसल को हुए नुकसान की जांच के लिए पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के शोध विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में तीन सदस्यों वाली कमेटी बनाई गई है। पशुओं को हुए नुकसान की जांच के लिए गुरु अंगद देव वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के निदेशक की अध्यक्षता में तीन सदस्यों वाली कमेटी गठित कर दी गई है। इसके साथ ही गांववासियों और जत्थबंदियों से कुछ व्यक्ति और एक्सपर्ट को इन कमेटियों में शामिल किया जाएगा।
फैक्टरी को हुए नुकसान की एवज में सरकार 20 करोड़ करवा चुकी है जमा
फैक्टरी के बाहर धरने को खत्म करवाने में विफल रहने के कारण हाईकोर्ट ने कंपनी के नुकसान की भरपाई के लिए 20 करोड़ रुपये हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करवाने का पंजाब सरकार को आदेश दिया था। कंपनी ने कोर्ट को बताया था कि इस यूनिट को लगाने में 300 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं, 200 करोड़ बाजार से उठाए गए थे। फैक्टरी को चलाने और स्टाफ के वेतन पर डेढ़ करोड़ का खर्च है और 2 करोड़ रुपये प्रतिमाह किस्त देनी पड़ती है। सरकार प्रदर्शनकारियों से मिली हुई है और ऐसे में उनका हर महीने करोड़ों का नुकसान हो रहा है।